ईरान युद्ध के बीच चीन की बड़ी कूटनीतिक जीत: दुनिया में सबसे ज्यादा तेल भंडार किया जमा, अमेरिका को पछाड़
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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ईरान युद्ध के बीच चीन की बड़ी कूटनीतिक जीत: दुनिया में सबसे ज्यादा तेल भंडार किया जमा, अमेरिका को पछाड़
नई दिल्ली,ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते युद्ध के तनाव ने वैश्विक तेल बाजार में हलचल मचा दी है। लेकिन इस संकट के गहराने से पहले ही चीन ने एक बड़ी रणनीतिक बढ़त हासिल कर ली है। अमेरिकी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, चीन ने साल 2026 की शुरुआत तक अपने कच्चे तेल के भंडार को रिकॉर्ड स्तर तक पहुँचा दिया है, जिससे वह भविष्य में किसी भी बड़े ऊर्जा संकट से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
दुनिया में सबसे बड़ा तेल भंडार चीन के पास
रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 के अंत तक चीन ने करीब 1.4 अरब बैरल तेल का विशाल भंडार जमा कर लिया था। यह आंकड़ा कितना बड़ा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ‘इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी’ (IEA) के 32 सदस्य देशों के पास कुल मिलाकर भी मात्र 1.2 अरब बैरल तेल है। दुनिया के सबसे बड़े आयातक होने के नाते चीन का यह कदम वैश्विक विशेषज्ञों द्वारा अत्यंत दूरदर्शी और रणनीतिक माना जा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 के अंत तक चीन ने करीब 1.4 अरब बैरल तेल का विशाल भंडार जमा कर लिया था। यह आंकड़ा कितना बड़ा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ‘इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी’ (IEA) के 32 सदस्य देशों के पास कुल मिलाकर भी मात्र 1.2 अरब बैरल तेल है। दुनिया के सबसे बड़े आयातक होने के नाते चीन का यह कदम वैश्विक विशेषज्ञों द्वारा अत्यंत दूरदर्शी और रणनीतिक माना जा रहा है।
चीन की इस तैयारी के तीन मुख्य कारण:
- सस्ता तेल खरीदने का अवसर: वैश्विक मांग में गिरावट के दौरान तेल की कीमतें कम थीं, जिसका चीन ने भरपूर फायदा उठाया।
- प्रतिबंधों का खतरा: रूस, ईरान और वेनेजुएला जैसे देशों पर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और सप्लाई चेन में बाधा की आशंका को देखते हुए चीन ने पहले ही स्टॉक बढ़ाना शुरू कर दिया था।
ऊर्जा सुरक्षा की रणनीति: चीन सरकार ने अपनी घरेलू कंपनियों को कड़े निर्देश दिए थे कि भविष्य की अनिश्चितताओं को देखते हुए ज्यादा से ज्यादा भंडारण सुनिश्चित किया जाए।
मुसीबत में अमेरिका, राहत में चीन
जहाँ एक ओर चीन अपने भंडार भर चुका है, वहीं अमेरिका को अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) से तेल निकालना पड़ रहा है। अप्रैल में अमेरिका ने करीब 80 लाख बैरल तेल बेचा, जिसके बाद उसके पास अब केवल 40 करोड़ बैरल के आसपास ही भंडार बचा है, जो चीन के मुकाबले काफी कम है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर संकट
युद्ध के कारण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में तेल की आपूर्ति ठप होने का खतरा बढ़ गया है। दुनिया का 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक अमेरिका उसके बंदरगाहों पर लगी पाबंदियां नहीं हटाता, तब तक इस समुद्री मार्ग को पूरी तरह नहीं खोला जाएगा। ऐसे में जहाँ दुनिया तेल की कमी और बढ़ती कीमतों से जूझ सकती है, वहीं चीन अपने विशाल भंडार के दम पर लंबे समय तक अपनी अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने में सक्षम है।





