छत्तीसगढ़: सरकारी कर्मचारियों की राजनीतिक सक्रियता पर ‘ब्रेक’ लगाने के फैसले पर सरकार का 24 घंटे में यू-टर्न
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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छत्तीसगढ़: सरकारी कर्मचारियों की राजनीतिक सक्रियता पर ‘ब्रेक’ लगाने के फैसले पर सरकार का 24 घंटे में यू-टर्न
रायपुर। छत्तीसगढ़ में शासकीय कर्मचारियों की राजनीतिक गतिविधियों पर लगाम लगाने के अपने ही फैसले से सरकार ने महज 24 घंटे के भीतर कदम पीछे खींच लिए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा जारी आदेश को अचानक स्थगित किए जाने से प्रशासनिक और सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई है।
कड़े प्रतिबंधों वाला वह आदेश, जिसने मचाई खलबली
बता दें कि सामान्य प्रशासन विभाग ने ‘छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम’ का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए सभी विभागाध्यक्षों और कलेक्टरों को एक सख्त निर्देश जारी किया था। इस आदेश में स्पष्ट किया गया था कि:
कोई भी शासकीय सेवक किसी भी राजनीतिक दल या संगठन का सदस्य नहीं बन सकता।
प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी राजनीतिक गतिविधि या आंदोलन में भाग लेना प्रतिबंधित होगा।
बिना पूर्व अनुमति के किसी भी संस्था या निकाय में पद धारण करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई (निलंबन या सेवा समाप्ति तक) की चेतावनी दी गई थी।
24 घंटे में ऐसा क्या बदला?
हैरानी की बात यह रही कि आदेश की स्याही अभी सूखी भी नहीं थी कि विभाग ने एक नया पत्र जारी कर पुराने निर्देशों को ‘अगले आदेश तक’ स्थगित कर दिया। सरकार के इस त्वरित ‘यू-टर्न’ ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। चर्चा है कि प्रदेश के शक्तिशाली कर्मचारी संगठनों के संभावित विरोध और अंदरूनी असंतोष को भांपते हुए सरकार ने बैकफुट पर जाना बेहतर समझा।
सियासी और प्रशासनिक गलियारों में चर्चाएं तेज
जानकारों का मानना है कि इतनी जल्दी आदेश वापस लेना या तो किसी तकनीकी त्रुटि का परिणाम है या फिर बड़े स्तर पर पड़ने वाले राजनीतिक दबाव का। कर्मचारी संगठनों का तर्क था कि नियमों की आड़ में उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित करने की कोशिश की जा रही थी। फिलहाल, इस फैसले के स्थगित होने से कर्मचारियों ने राहत की सांस ली है, लेकिन प्रशासनिक हलकों में यह सवाल अब भी बरकरार है कि आखिर किन परिस्थितियों में सरकार को अपना फैसला पलटना पड़ा।





