कर्तव्य की वेदी पर प्राण न्योछावर: रातभर गश्त के बाद विभागीय काम से लौटे वाड्रफनगर के आरक्षक की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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कर्तव्य की वेदी पर प्राण न्योछावर: रातभर गश्त के बाद विभागीय काम से लौटे वाड्रफनगर के आरक्षक की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत
सूरजपुर/वाड्रफनगर: अंबिकापुर-बनारस मार्ग पर चंदौरा थाना क्षेत्र में रविवार को एक हृदय विदारक सड़क हादसे में वाड्रफनगर पुलिस चौकी में पदस्थ आरक्षक रामगोपाल की दर्दनाक मौत हो गई। एक तेज रफ्तार अनियंत्रित ट्रक ने उनकी मोटरसाइकिल को अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी भीषण थी कि कर्तव्यनिष्ठ आरक्षक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। इस दर्दनाक हादसे की खबर मिलते ही पूरे पुलिस महकमे में शोक की लहर दौड़ गई है। उच्च अधिकारियों से लेकर साथी जवानों तक, हर आंख नम है।
रातभर की ड्यूटी के बाद आराम भी नहीं किया
जानकारी के अनुसार, आरक्षक रामगोपाल ने शनिवार की पूरी रात पूरी निष्ठा के साथ क्षेत्र में रात्रि गश्त (नाइट पेट्रोलिंग) की थी। रविवार सुबह करीब पांच बजे वे पुलिस टीम के साथ वापस वाड्रफनगर चौकी लौटे थे। रातभर जागने के कारण वे बेहद थके हुए थे, लेकिन आराम करने के बजाय वे एक जरूरी विभागीय कार्य को निपटाने के लिए तत्काल प्रतापपुर के लिए रवाना हो गए।
लौटते समय काल बनकर आया ट्रक
प्रतापपुर में विभागीय काम खत्म करने के बाद, आरक्षक रामगोपाल अपनी बाइक से वापस वाड्रफनगर लौट रहे थे। इसी दौरान अंबिकापुर-बनारस मार्ग पर चंदौरा थाना क्षेत्र के पास सामने से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। रामगोपाल को संभलने का मौका तक नहीं मिला और घटनास्थल पर ही उनकी सांसें थम गईं।
ट्रक जब्त, पुलिस महकमे में मातम
घटना की सूचना मिलते ही चंदौरा थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया और दुर्घटनाकारित ट्रक को जब्त कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। आरक्षक रामगोपाल के परिवार में उनकी पत्नी और दो बच्चे हैं, जिनका रो-रोकर बुरा हाल है।
‘हंसमुख और बेहद जिम्मेदार जवान थे रामगोपाल’
वाड्रफनगर चौकी के सहकर्मियों ने रुंधे गले से बताया कि रामगोपाल बेहद मिलनसार, हंसमुख और कर्तव्य के प्रति समर्पित पुलिसकर्मी थे। अधिकारियों से लेकर जवानों तक, उनका व्यवहार सभी के साथ बेहद आत्मीय था। उन्हें जो भी जिम्मेदारी सौंपी जाती, उसे वे अपनी जान की परवाह किए बिना पूरी ईमानदारी से निभाते थे। ड्यूटी के प्रति उनका यह समर्पण ही था कि वे रातभर जागने के बाद भी बिना सोए काम पर निकल गए थे। उनके असमय चले जाने से पूरा स्टाफ भावनात्मक रूप से टूट गया है और चौकी में सन्नाटा पसरा हुआ है।





