सुधार की नई सुबह: छत्तीसगढ़ की पहली ‘ओपन जेल’ को मंजूरी, चारदीवारी के बिना आत्मनिर्भर बनेंगे कैदी

 सुधार की नई सुबह: छत्तीसगढ़ की पहली ‘ओपन जेल’ को मंजूरी, चारदीवारी के बिना आत्मनिर्भर बनेंगे कैदी

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

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सुधार की नई सुबह: छत्तीसगढ़ की पहली ‘ओपन जेल’ को मंजूरी, चारदीवारी के बिना आत्मनिर्भर बनेंगे कैदी

 

, रायपुर।छत्तीसगढ़ के जेल प्रशासन ने बंदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य सरकार ने बेमेतरा जिले के पथर्रा गांव में प्रदेश की पहली ‘ओपन जेल’ (खुली जेल) के निर्माण को हरी झंडी दे दी है। जेल विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर पूरी रूपरेखा तैयार कर ली है।

10.20 हेक्टेयर में फैलेगा सुधार केंद्र, 200 बंदियों की होगी क्षमता

यह महत्वाकांक्षी परियोजना 10.20 हेक्टेयर के विशाल क्षेत्रफल में निर्मित की जाएगी, जिसमें एक साथ 200 बंदियों को रखने की क्षमता होगी। जेल विभाग के डीजी हिमांशु गुप्ता के अनुसार, इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बंदियों का पुनः सामाजिक समावेशन और उनके मानवाधिकारों की रक्षा करना है। इसे केवल एक दंडात्मक कारावास के रूप में नहीं, बल्कि एक आधुनिक सुधार केंद्र के तौर पर विकसित किया जा रहा है।

यहाँ बंदियों के लिए सर्वसुविधा

जनक आवास, शुद्ध पेयजल, पौष्टिक भोजन और मनोरंजन की उत्तम व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इसके साथ ही सुरक्षा स्टाफ के लिए भी आधुनिक क्वार्टर और बैरक बनाए जाएंगे ताकि जेल प्रशासन व बंदियों के बीच बेहतर समन्वय बना रहे।

रोजगार के गुर सीखकर अपराध से दूर होंगे बंदी

ओपन जेल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ बंदियों को सलाखों या चारदीवारी के पीछे कैद नहीं रखा जाएगा। उन्हें सीमित निगरानी में एक स्वतंत्र और सकारात्मक माहौल दिया जाएगा, जहाँ वे आत्मनिर्भरता के पाठ पढ़ेंगे। बंदियों को स्वावलंबी बनाने के लिए 16 से अधिक रोजगारपरक कार्यों में प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके तहत उन्हें मुख्य रूप से निम्नलिखित हुनर सिखाए जाएंगे:कृषि व पशुपालन: गौशाला, डेयरी उद्योग, उन्नत सब्जी उत्पादन और मुर्गी पालन।पारंपरिक कुटीर उद्योग: सिलाई, काष्ठ कला (लकड़ी की कारीगरी) और अन्य लघु उद्योग।

आधुनिक तकनीकी कौशल: एलईडी (LED) बल्ब व ट्यूबलाइट निर्माण और फेब्रिकेशन का काम।

इतना ही नहीं, कैदियों द्वारा तैयार सामान की बिक्री के लिए जेल के बाहर एक विशेष एंपोरियम बनाया जाएगा। साथ ही, बेमेतरा-सिमगा रोड पर ‘आस्था कैफे’ और ग्रॉसरी शॉप भी शुरू की जाएगी, जिसका संचालन खुद कैदी करेंगे। यह पहल बंदियों को अपराध की दुनिया से दूर कर समाज में सम्मानजनक जीवन जीने के लिए प्रेरित करेगी।

💡 क्या होती है ‘ओपन जेल’ (Open Jail)

?आमतौर पर जेल का नाम सुनते ही दिमाग में ऊंची दीवारें, कटीले तार, लोहे की सलाखें और कड़ा पहरा याद आता है। लेकिन ओपन जेल (खुली जेल) इससे बिल्कुल अलग एक सुधारात्मक व्यवस्था है।स्वतंत्र वातावरण: यहाँ कैदियों को बंद कोठरियों में रखने के बजाय एक खुले परिसर में रहने की आजादी होती है।सीमित निगरानी: कैदी बिना किसी कड़े पहरे के नियमों के दायरे में रहकर परिसर के भीतर स्वतंत्र रूप से घूम सकते हैं।

रोजगार की छूट:

कैदियों को दिन के समय खेती, डेयरी, कैफे या अपनी पसंद के वैध व्यवसायों में काम करने की पूरी अनुमति होती है।पुनर्वास पर जोर: इसका मूल सिद्धांत “कठोर दंड नहीं, बल्कि आचरण में सुधार” है, जिससे सजा पूरी होने के बाद कैदी समाज पर बोझ बनने के बजाय एक जिम्मेदार नागरिक बन सकें।

📋 किन कैदियों को मिलेगा इस खुली जेल का टिकट?

ओपन जेल में हर किसी को नहीं भेजा जाता है। इसके लिए जेल महानिदेशक (DG जेल) की अध्यक्षता वाली एक विशेष समिति कड़े मापदंडों के आधार पर कैदियों का चयन करेगी:लंबी सजा और अच्छा रिकॉर्ड: आजीवन कारावास काट रहे ऐसे कैदी जिन्होंने कम से कम 11 से 13 साल की सजा पूरी कर ली हो।उत्कृष्ट आचरण: जेल में रहने के दौरान जिनका व्यवहार बहुत अच्छा और अनुशासित रहा हो।कम जोखिम: ऐसे बंदी जिनके द्वारा दोबारा गंभीर अपराध करने या भागने की कोई आशंका न हो।