फेसबुक पर सरगुजा SSP राजेश अग्रवाल की फर्जी आईडी: फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजकर मांगे जा रहे नंबर, साइबर सेल जांच में जुटी
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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फेसबुक पर सरगुजा SSP राजेश अग्रवाल की फर्जी आईडी: फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजकर मांगे जा रहे नंबर, साइबर सेल जांच में जुटी
अंबिकापुर / सरगुजा:साइबर ठगों ने अब पुलिस के बड़े अधिकारियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। ताजा मामला सरगुजा जिले का है, जहां वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) राजेश अग्रवाल की एक फर्जी फेसबुक आईडी बनाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस फेक प्रोफाइल के जरिए ठग लोगों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज रहे हैं और चैट बॉक्स में उनके मोबाइल नंबर मांग रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी ने खुद इसकी शिकायत दर्ज कराई है।

फोटो और बैठक की तस्वीर का इस्तेमाल
ठगों ने एसएसपी राजेश अग्रवाल की आधिकारिक फोटो का इस्तेमाल कर हिंदी में नाम लिखकर यह फर्जी प्रोफाइल तैयार की है। इस आईडी को असली दिखाने के लिए शातिरों ने एक विभागीय बैठक की तस्वीर भी अपलोड की है, जिसमें एसएसपी राजेश अग्रवाल के साथ एडिशनल एसपी अमोलक सिंह और सीएसपी राहुल बंसल नजर आ रहे हैं। ठगों ने इस फर्जी आईडी से अब तक 72 लोगों को अपनी फ्रेंड लिस्ट में जोड़ भी लिया है।
चैट बॉक्स में मोबाइल नंबर मांगने पर खुला राज
कुछ यूजर्स ने जब इस आईडी से आई फ्रेंड रिक्वेस्ट को स्वीकार किया, तो ठगों ने मैसेंजर पर उनसे चैट करना शुरू कर दिया और उनके मोबाइल नंबर मांगने लगे। पुलिस कप्तान द्वारा अचानक नंबर मांगे जाने पर लोगों को संदेह हुआ।
इसके बाद कुछ जागरूक नागरिकों ने इसकी सीधी जानकारी एसएसपी राजेश अग्रवाल को दी, जिससे इस पूरी धोखाधड़ी का खुलासा हुआ।एसएसपी राजेश अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि यह आईडी पूरी तरह फर्जी है। उनकी असली फेसबुक प्रोफाइल अलग है, जिस पर लगभग 4,800 फॉलोअर्स हैं। वे इंटरनेट मीडिया पर सक्रिय रहते हैं, और इसी का फायदा उठाकर ठगों ने उनकी फर्जी प्रोफाइल तैयार की है।
एसएसपी की अपील: झांसे में न आएं, रहें सतर्क
मामले पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल ने कहा, “फर्जी आईडी के खिलाफ शिकायत दर्ज कर ली गई है। हमारी साइबर सेल इसकी बारीकी से जांच कर रही है। इसके साथ ही मेटा (फेसबुक की पैरेंट कंपनी) को भी इस फर्जी प्रोफाइल को ब्लॉक करने के लिए रिपोर्ट भेजी गई है। आम जनता से अपील है कि किसी भी संदिग्ध या अनजान आईडी से आने वाले मैसेज या फ्रेंड रिक्वेस्ट पर भरोसा न करें। यदि कोई संदेह हो, तो तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दें।
“पहले भी कलेक्टरों के नाम पर हो चुकी है ठगी की कोशिश
सरगुजा संभाग में वीआईपी और प्रशासनिक अफसरों के नाम का दुरुपयोग करने का यह पहला मामला नहीं है।साल 2024 में साइबर ठगों ने तत्कालीन सरगुजा कलेक्टर विलास भोस्कर का फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट बना लिया था, जिसे शिकायत के बाद ब्लॉक कराया गया।
बलरामपुर कलेक्टर रिमिजियुस एक्का के नाम पर भी विदेशी नंबरों से फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट बनाकर कर्मचारियों और आम लोगों से पैसों की मांग की गई थी।पुलिस ने आम जनता और शासकीय कर्मचारियों को आगाह किया है कि साइबर अपराधी अब रसूखदार अधिकारियों के नाम का सहारा लेकर लोगों को झांसे में ले रहे हैं। इसलिए किसी भी अधिकारी के नाम से आने वाले मैसेज, कॉल या सोशल मीडिया रिक्वेस्ट पर बिना वेरिफिकेशन के भरोसा न करें और न ही कोई गोपनीय जानकारी साझा करें।





