स्वर कोकिला की विदाई: सुरों की मलिका आशा भोसले का निधन, संगीत जगत में शोक की लहर
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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स्वर कोकिला की विदाई: सुरों की मलिका आशा भोसले का निधन, संगीत जगत में शोक की लहर
मुंबई: भारतीय संगीत जगत के लिए आज का दिन एक युग के अंत जैसा है। अपनी जादुई आवाज से सात दशकों तक करोड़ों दिलों पर राज करने वाली दिग्गज गायिका आशा भोसले अब हमारे बीच नहीं रहीं। 92 वर्ष की आयु में मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।

अंतिम समय में साथ रही पोती जनाई
खबरों के मुताबिक, आशा जी को एक दिन पहले कार्डियक अरेस्ट आने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी पोती जनाई भोसले, जो अपनी दादी के बेहद करीब थीं, ने अस्पताल से उनकी एक तस्वीर साझा कर प्रशंसकों को स्वास्थ्य अपडेट दिया था। इस तस्वीर में दादी-पोती का अटूट प्रेम साफ झलक रहा था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
कल होगा अंतिम संस्कार
आशा भोसले के निधन की खबर मिलते ही पूरा बॉलीवुड और उनके चाहने वाले गमगीन हैं। सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा हुआ है। जानकारी के अनुसार, महान गायिका का अंतिम संस्कार कल (13 अप्रैल) को मुंबई में किया जाएगा, जहां फिल्म जगत की तमाम हस्तियां उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचेंगी।
संघर्षों से भरा रहा शुरुआती सफर
9 साल की उम्र में पिता दीनानाथ मंगेशकर को खोने के बाद, आशा जी ने अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर के साथ मिलकर परिवार की जिम्मेदारी उठाई। उनका जीवन उतार-चढ़ाव से भरा रहा। महज 16 साल की उम्र में उन्होंने अपनी बहन के 31 वर्षीय सेक्रेटरी गणपतराव भोसले से भागकर शादी कर ली थी। इस फैसले के कारण मंगेशकर परिवार उनसे काफी समय तक नाराज रहा और लता जी से उनके संबंधों में लंबे समय तक खटास रही।
12,000 गानों का बेमिसाल सफर
आशा भोसले ने अपने करियर में 20 से अधिक भाषाओं में 12,000 से ज्यादा गाने गाए। उनके कुछ सदाबहार नगमे जैसे:
दम मारो दम (हरे रामा हरे कृष्णा)
पिया तू अब तो आजा (कारवां)
चुरा लिया है तुमने जो दिल को (यादों की बारात)
इन आंखों की मस्ती के (उमराव जान)
उनकी आवाज में वो खनक और बहुमुखी प्रतिभा (Versatility) थी कि वे शास्त्रीय संगीत से लेकर कैबरे और पॉप गानों तक को जीवंत कर देती थीं। 2011 में ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ ने उन्हें संगीत इतिहास में सबसे अधिक रिकॉर्ड की गई कलाकार के रूप में मान्यता दी थी।
आशा भोसले का जाना न केवल मंगेशकर परिवार के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के संगीत प्रेमियों के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनकी आवाज की गूंज हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेगी।





