निजी आवास में प्रार्थना सभा के लिए पूर्व अनुमति की जरूरत नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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निजी आवास में प्रार्थना सभा के लिए पूर्व अनुमति की जरूरत नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने धार्मिक स्वतंत्रता और निजी अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति को अपने निजी निवास के भीतर शांतिपूर्ण तरीके से प्रार्थना सभा आयोजित करने के लिए प्रशासन या पुलिस से किसी भी प्रकार की पूर्व अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है।
अनावश्यक पुलिस हस्तक्षेप पर रोक
न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी की एकलपीठ ने जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ थाना क्षेत्र से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। अदालत ने पुलिस द्वारा याचिकाकर्ताओं को जारी किए गए नोटिसों को निरस्त कर दिया है। साथ ही, पुलिस प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ताओं को उनके निजी आवास में प्रार्थना करने से न रोका जाए और उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए।
क्या है पूरा मामला?
मामला जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम गोधन का है। याचिकाकर्ताओं ने अधिवक्ता के माध्यम से अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दायर कर नवागढ़ पुलिस द्वारा जारी नोटिसों और 7 दिसंबर 2025 के एक आदेश को चुनौती दी थी।
याचिकाकर्ताओं का पक्ष था कि वे अपने निजी मकान की पहली मंजिल पर बने हॉल में साल 2016 से ईसाई धर्म की प्रार्थना सभाएं आयोजित कर रहे हैं।
उनका तर्क था कि यह सभाएं शांतिपूर्ण होती हैं और इससे कानून-व्यवस्था को कोई खतरा नहीं है।
बावजूद इसके, पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 94 के तहत बार-बार नोटिस जारी कर सभाओं पर रोक लगाने का प्रयास किया।
राज्य सरकार की दलील
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ पूर्व में आपराधिक मामले दर्ज हैं और वे जेल भी जा चुके हैं। प्रशासन का कहना था कि बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के इतनी बड़ी संख्या में लोगों को जुटाकर प्रार्थना सभा करना उचित नहीं है, इसीलिए पुलिस ने नोटिस जारी किए थे।
कोर्ट की टिप्पणी और आदेश
सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि निजी संपत्ति पर शांतिपूर्ण धार्मिक आयोजन करना व्यक्ति का संवैधानिक अधिकार है। कोर्ट ने ग्राम पंचायत द्वारा दबाव में आकर ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ (NOC) वापस लेने और पुलिस की कार्रवाई को अनुचित ठहराया।
अदालत ने साफ किया कि यदि कोई अवैध गतिविधि नहीं हो रही है, तो केवल प्रार्थना सभा के आधार पर किसी को परेशान नहीं किया जा सकता। इस आदेश के बाद अब निजी परिसरों में होने वाले धार्मिक आयोजनों में पुलिसिया दखल पर लगाम लगेगी।





