महादेव सट्टा ऐप का मुख्य सरगना सौरभ चंद्राकर गिरफ्तार: ओमान से प्रत्यर्पित कर रायपुर लाया गया, CBI दफ्तर की सुरक्षा सख्त
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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महादेव सट्टा ऐप का मुख्य सरगना सौरभ चंद्राकर गिरफ्तार: ओमान से प्रत्यर्पित कर रायपुर लाया गया, CBI दफ्तर की सुरक्षा सख्त
अंधेरे के साये में एयरपोर्ट से निकाला बाहर; कल कोर्ट में पेश कर रिमांड मांगेगी CBI, हवाला नेटवर्क और राजनीतिक संरक्षण के खुलेंगे राज
रायपुर: महादेव ऑनलाइन सट्टा मामले के मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की टीम ओमान से प्रत्यर्पित कर रायपुर ले आई है। मीडिया की नज़रों से बचाने के लिए एयरपोर्ट की तमाम लाइटें बंद करवाकर सुरक्षा घेरे के बीच उसे सीधे रायपुर स्थित CBI दफ्तर पहुँचाया गया। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद एजेंसी के रायपुर दफ्तर की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।



कल कोर्ट में पेशी, रिमांड की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, CBI की टीम सौरभ चंद्राकर को कल स्थानीय अदालत में पेश करेगी। एजेंसी मामले की तह तक पहुँचने और पूछताछ के लिए उसकी पुलिस रिमांड की मांग करेगी। चंद्राकर से सट्टे की काली कमाई, हवाला नेटवर्क और कथित तौर पर मिले राजनीतिक व प्रशासनिक संरक्षण को लेकर गहन पूछताछ की जाएगी।
करोड़ों का नेटवर्क और 3,000 से अधिक शाखाएं
CBI के मुताबिक, महादेव ऑनलाइन बुक सिंडिकेट देश का सबसे बड़ा और जटिल अवैध ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क चला रहा था।
नेटवर्क: क्रिकेट, फुटबॉल और अन्य खेलों पर सट्टा लगाने के लिए देश भर में 3,000 से अधिक पैनल और शाखाएं संचालित की जा रही थीं।
पैसे का लेनदेन: सट्टे से मिलने वाली रकम को पहले फर्जी (म्यूल) बैंक खातों में जमा कराया जाता था। इसके बाद कई परतों में लेन-देन करके हवाला के ज़रिए यह रकम विदेश भेजी जाती थी।
राजनीतिक-प्रशासनिक सांठगांठ की भी जांच
जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि इस अवैध कारोबार को जारी रखने के लिए किन-किन राजनेताओं, पुलिसकर्मियों और प्रशासनिक अधिकारियों को कथित तौर पर ‘संरक्षण राशि’ (प्रोटेक्शन मनी) दी गई।
₹94,400 करोड़ का अनुमानित घोटाला:
प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा सितंबर 2026 में अदालत में दाखिल की गई शिकायत के अनुसार, इस सट्टा प्लेटफॉर्म से लगभग ₹94,400 करोड़ की अपराध से अर्जित आय (Proceeds of Crime) जनरेट होने का अनुमान है। हालांकि, यह जांच एजेंसी का अपना आकलन है और अभी अदालत में प्रमाणित होना बाकी है।
सौरभ चंद्राकर के भारत आने और CBI की रिमांड के बाद इस पूरे सट्टा सिंडिकेट से जुड़े कई बड़े चेहरों और नए राज़ों से पर्दा उठने की पूरी संभावना है।





