दुर्ग: मूक-बधिर युवती से दरिंदगी की कोशिश करने वाले आरोपी को 8 साल की सजा, कोर्ट ने कहा- ‘भरोसे का कत्ल अक्षम्य’

 दुर्ग: मूक-बधिर युवती से दरिंदगी की कोशिश करने वाले आरोपी को 8 साल की सजा, कोर्ट ने कहा- ‘भरोसे का कत्ल अक्षम्य’

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

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दुर्ग: मूक-बधिर युवती से दरिंदगी की कोशिश करने वाले आरोपी को 8 साल की सजा, कोर्ट ने कहा- ‘भरोसे का कत्ल अक्षम्य’

दुर्ग। दुर्ग जिला एवं सत्र न्यायालय ने एक मूक-बधिर युवती के साथ छेड़छाड़ और दुष्कर्म के प्रयास के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। न्यायाधीश अवध किशोर की कोर्ट ने आरोपी तामेश्वर यादव को दोषी करार देते हुए कुल 8 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में स्पष्ट किया कि दिव्यांग वर्ग समाज का संवेदनशील हिस्सा है और उनके भरोसे का दुरुपयोग करना गंभीर अपराध है।

घर में अकेली पाकर किया था हमला

मामला मोहन नगर थाना क्षेत्र का है। 8 अप्रैल 2025 को पीड़िता अपने घर पर अकेली सो रही थी, तभी उसके पिता का दोस्त तामेश्वर यादव वहां घुस आया। उसने पीड़िता के साथ जबरन छेड़छाड़ की और दुष्कर्म का प्रयास किया। विरोध करने पर आरोपी ने पीड़िता के हाथ पर काटा और उसके साथ मारपीट भी की। घटना के बाद आरोपी फरार हो गया था, जिसे पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए गिरफ्तार कर लिया था।

सांकेतिक भाषा में गवाही बनी जीत का आधार

इस केस में सबसे बड़ी चुनौती पीड़िता का बोल और सुन न पाना था, लेकिन न्यायालय में उसकी सांकेतिक भाषा (Sign Language) के माध्यम से दर्ज कराई गई गवाही सबसे अहम कड़ी साबित हुई। कोर्ट ने पीड़िता के बयानों को पूरी तरह विश्वसनीय माना। इसके अलावा पीड़िता के फटे कपड़े और माता-पिता व पड़ोसियों के बयान ने भी अभियोजन के पक्ष को मजबूती दी।

इन धाराओं में मिली सजा

बचाव पक्ष ने मेडिकल रिपोर्ट में बाहरी चोट न होने का तर्क दिया, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने आरोपी को निम्नलिखित धाराओं में सजा सुनाई:

भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 74: 5 साल का कठोर कारावास और 500 रुपये जुर्माना।

धारा 75 (2): 3 साल का कठोर कारावास।

न्यायालय के आदेशानुसार ये दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। इस फैसले ने समाज में यह कड़ा संदेश दिया है कि दिव्यांगों के विरुद्ध अपराध करने वालों को कानून किसी भी कीमत पर नहीं बख्शेगा।

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