सावधान! ‘मैरिज ब्यूरो’ की आड़ में देशभर के कुंवारे बन रहे थे शिकार; राजनांदगांव पुलिस ने अंतरराज्यीय गिरोह का किया भंडाफोड़

 सावधान! ‘मैरिज ब्यूरो’ की आड़ में देशभर के कुंवारे बन रहे थे शिकार; राजनांदगांव पुलिस ने अंतरराज्यीय गिरोह का किया भंडाफोड़

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

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सावधान! ‘मैरिज ब्यूरो’ की आड़ में देशभर के कुंवारे बन रहे थे शिकार; राजनांदगांव पुलिस ने अंतरराज्यीय गिरोह का किया भंडाफोड़

राजनांदगांव (बसंतपुर): शादी के लिए हमसफर तलाश रहे युवकों की मजबूरी का फायदा उठाकर ठगी करने वाले एक बड़े रैकेट का राजनांदगांव पुलिस ने पर्दाफाश किया है। शहर के बसंतपुर थाना क्षेत्र में ‘लव लाइफ रिश्ते मैरिज ब्यूरो’ के नाम पर ठगी का यह काला खेल चल रहा था। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ब्यूरो के डायरेक्टर धर्मेंद्र मानिकपुरी और संचालक नेहा पाठक को 1 अप्रैल को गिरफ्तार कर लिया है।

देशभर में फैला था जाल, प्रोफाइल देख फंसाते थे शिकार

पकड़े गए आरोपियों के पास से पुलिस को भारी मात्रा में दस्तावेज मिले हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ समेत राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के युवकों की प्रोफाइल शामिल है। ठग गिरोह सोशल मीडिया और अखबारों में विज्ञापन देकर लोगों को अपने जाल में फंसाता था।

1500 रुपये से शुरू होता था ‘ठगी का मीटर’

पीड़ितों के अनुसार, गिरोह पहले रजिस्ट्रेशन के नाम पर मात्र 1500 रुपये वसूलता था। एक बार युवक के जाल में फंसने के बाद, लड़की से बात कराने, मीटिंग फिक्स करने और अन्य सुविधाओं के नाम पर किस्तों में मोटी रकम ऐंठी जाती थी। जब युवक शादी का दबाव बनाता, तो गिरोह कोई न कोई बहाना बनाकर या आधी-अधूरी रकम लौटाकर मामला रफा-दफा कर देता था।

मजदूर से लेकर कारोबारी तक लुटे

इस गिरोह ने किसी को नहीं बख्शा। ठगी का शिकार होने वालों में 12 हजार कमाने वाले कुक से लेकर बड़े कारोबारी तक शामिल हैं:

केस 1: बिलासपुर के एक कुक से शादी का झांसा देकर 34,000 रुपये ठग लिए गए।

केस 2: राजस्थान के एक कारोबारी से विधवा महिला से रिश्ता कराने के नाम पर 42,000 रुपये वसूले गए और अंत में बच्ची की बीमारी का झूठा बहाना बनाकर संपर्क तोड़ दिया गया।

38 लाख से ऊपर जा सकता है ठगी का आंकड़ा

पुलिस की शुरुआती जांच में अब तक 38 लाख रुपये की ठगी सामने आई है। हालांकि, पुलिस को अंदेशा है कि यह आंकड़ा काफी बड़ा हो सकता है। फिलहाल गिरोह के अन्य बैंक खातों की बारीकी से जांच की जा रही है।

लोक-लाज बनी ठगों का हथियार

जांच में यह भी सामने आया कि कई पीड़ितों ने समाज में बदनामी और मजाक बनने के डर से पुलिस में शिकायत नहीं की। कुछ लोग तो ठगों द्वारा बनाई गई मनगढ़ंत कहानियों (जैसे बीमारी या घरेलू समस्या) पर सहानुभूति दिखाते हुए अपनी मेहनत की कमाई गंवा बैठे।

पुलिस की अपील: यदि आप या आपका कोई परिचित इस तरह के किसी झांसे में आया है, तो तुरंत नजदीकी थाने में इसकी सूचना दें।