ओडिशा से धान की अवैध आवक रोकने में गरियाबंद पुलिस का नया रिकॉर्ड; देवभोग में सर्वाधिक 41 वाहन जब्त

 ओडिशा से धान की अवैध आवक रोकने में गरियाबंद पुलिस का नया रिकॉर्ड; देवभोग में सर्वाधिक 41 वाहन जब्त

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

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ओडिशा से धान की अवैध आवक रोकने में गरियाबंद पुलिस का नया रिकॉर्ड; देवभोग में सर्वाधिक 41 वाहन जब्त

गरियाबंद:छत्तीसगढ़ में इस बार समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के दौरान सीमावर्ती राज्यों से आने वाले अवैध धान पर नकेल कसने में पुलिस प्रशासन ने ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। गरियाबंद जिले में पुलिस ने अवैध परिवहन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कुल 85 वाहनों से 4504.25 क्विंटल धान जब्त किया है, जिसकी बाजार कीमत लगभग 1 करोड़ 39 लाख रुपये आंकी गई है। इसमें सबसे बड़ी कार्रवाई देवभोग पुलिस द्वारा की गई, जिसने अकेले 41 वाहनों से 1576 क्विंटल धान बरामद कर एक नया रिकॉर्ड कायम किया है।

प्रशासनिक रणनीति से थमी आवक

अवैध परिवहन को रोकने में तत्कालीन पुलिस कप्तान निखिल राखेचा और वर्तमान कप्तान वेद व्रत सिरमौर्य की कारगर रणनीति का अहम योगदान रहा। पुलिस के अलावा राजस्व, सहकारिता, मंडी और खाद्य विभाग ने भी सक्रियता दिखाते हुए 30 से अधिक वाहन जब्त किए। सख्ती का आलम यह रहा कि जितनी जब्ती हुई, उससे तीन गुना अधिक धान की अवैध आवक रास्ते में ही थम गई।

सप्लायर नहीं दे पाए धान, 259 किसानों के टोकन निरस्त

प्रशासनिक सख्ती का सीधा असर धान खरीदी केंद्रों पर देखने को मिला। देवभोग और गोहरापदर ब्रांच के अंतर्गत आने वाले 21 खरीदी केंद्रों में कुल 259 किसानों के टोकन निरस्त कर दिए गए। ये किसान लगभग 13,000 क्विंटल धान बेचने में असमर्थ रहे। बताया जा रहा है कि इन किसानों ने टोकन तो कटवा लिए थे, लेकिन ओडिशा के सप्लायर उन्हें समय पर धान उपलब्ध नहीं करा पाए।

देवभोग ब्रांच: 112 किसानों का 6110 क्विंटल धान का टोकन निरस्त।

गोहरापदर ब्रांच: 147 किसानों का 6900 क्विंटल धान का टोकन निरस्त।

बोगस खरीदी पर लगा लगाम

जिला खाद्य अधिकारी अरविंद दुबे के अनुसार, निगरानी और सख्त कार्रवाई के कारण ही केंद्रों में आवक वास्तविक उत्पादन के अनुरूप रही है। वहीं, देवभोग तहसीलदार अजय चंद्रवंशी ने बताया कि इस कार्रवाई से बोगस खरीदी पर पूरी तरह लगाम लग गई है और ओडिशा के धान पर निर्भरता खत्म हुई है। अब प्रशासन उन किसानों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) करा रहा है जिन्होंने धान नहीं बेचा है, ताकि वास्तविक स्टॉक की जानकारी मिल सके और कम उत्पादन वाले किसान अपना रकबा समर्पण कर सकें।