अजूबा! गुजरात के दाहोद में मिला दो सिर और 4 आंखों वाला दुर्लभ सांप, देखने वालों के उड़े होश
छत्तीसगढ़ राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान
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अजूबा! गुजरात के दाहोद में मिला दो सिर और 4 आंखों वाला दुर्लभ सांप, देखने वालों के उड़े होश
दाहोद ,गुजरात। प्रकृति के अनूठे कारनामों के बीच गुजरात के दाहोद जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। दाहोद के धानपुर तालुका स्थित अगसवाणी गांव में एक खेत में दो सिर और चार आंखों वाला एक अत्यंत दुर्लभ सांप दिखाई दिया। दो सिर वाले इस अनोखे जीव को देखकर स्थानीय लोग हैरान रह गए और इसे देखने के लिए मौके पर लोगों का तांता लग गया।
6 इंच का है बच्चा, ‘दाहोद प्रकृति मित्र मंडल’ ने किया रेस्क्यू
खेत में दो सिर वाले सांप के मिलने की सूचना तुरंत स्थानीय वन्यजीव प्रेमियों को दी गई। जानकारी मिलते ही ‘दाहोद प्रकृति मित्र मंडल’ की टीम मौके पर पहुंची और सावधानीपूर्वक इस छोटे सांप का रेस्क्यू किया।
रेस्क्यू करने वाली टीम के अनुसार, यह ‘वुल्फ स्नेक’ (Wolf Snake) प्रजाति का बच्चा है, जिसकी लंबाई महज 6 इंच है।
क्या यह सांप जहरीला है?
वन्यजीव विशेषज्ञों ने साफ किया है कि वुल्फ स्नेक पूरी तरह से गैर-विषैला (Non-venomous) होता है। इसलिए इससे इंसान या अन्य जीवों को किसी भी प्रकार का जानलेवा खतरा नहीं है।
क्यों होते हैं सांप के दो सिर? जानिए वैज्ञानिक वजह
वैज्ञानिक भाषा में दो सिर वाले जीवों की इस शारीरिक स्थिति को ‘बायसेफली’ (Bicephaly) कहा जाता है।
आनुवंशिक म्यूटेशन: यह एक प्रकार की जेनेटिक गड़बड़ी (Genetic Mutation) या भ्रूण के विकास के दौरान जुड़वां बच्चों के अलग न हो पाने के कारण होता है।
दो स्वतंत्र दिमाग: इस अवस्था में एक ही शरीर पर दो अलग-अलग सिर और चार आंखें विकसित हो जाती हैं। दोनों सिरों के पास अपने अलग दिमाग और तंत्रिका तंत्र होते हैं।
संघर्ष और छोटी उम्र: दोनों सिर अलग-अलग दिशा में सोचने और प्रतिक्रिया देने का प्रयास करते हैं, जिससे भोजन निगलने या चलने की दिशा तय करने में सांप के दोनों सिरों में संघर्ष होता है। इसी कारण प्रकृति में ऐसे जीवों का जीवनकाल काफी कम होता है।
गुजरात का पहला और भारत का 5वां मामला
विशेषज्ञों के मुताबिक, गुजरात में दो सिर वाला वुल्फ स्नेक मिलने का यह पहला मामला माना जा रहा है, जबकि पूरे भारत में ऐसी दुर्लभ घटना का यह 5वां मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल रेस्क्यू किए गए इस दुर्लभ जीव को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर उसकी देखरेख और आगे की कानूनी व चिकित्सीय कार्रवाई की जा रही है।





