‘सांवला और मोटा बोलना तलाक का आधार नहीं’: बिलासपुर हाईकोर्ट ने खारिज की पति की याचिका, पत्नी को राहत
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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सांवला और मोटा बोलना तलाक का आधार नहीं’: बिलासपुर हाईकोर्ट ने खारिज की पति की याचिका, पत्नी को राहत
बिलासपुर।बिलासपुर हाईकोर्ट ने जांजगीर-चांपा जिले से जुड़े एक वैवाहिक विवाद में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पति की तलाक की अपील को खारिज कर दिया है। पति ने पत्नी पर ‘सांवला और मोटा’ कहकर अपमानित करने, क्रूरता बरतने और बिना किसी ठोस कारण के अलग रहने का आरोप लगाते हुए तलाक की मांग की थी। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया कि केवल आरोपों के आधार पर नहीं, बल्कि ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों के बिना तलाक की मंजूरी नहीं दी जा सकती।
क्या है पूरा मामला?
चांपा निवासी 28 वर्षीय आकाश घोष और 25 वर्षीय पूजा सीत का विवाह 7 मार्च 2019 को हिंदू रीति-रिवाज से हुआ था। पति का दावा था कि शादी के दो-तीन महीने बाद से ही दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया। पति के अनुसार, पत्नी उस पर गलत व्यवहार करती थी, झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देती थी और बिना बताए बार-बार मायके चली जाती थी।
पति ने यह भी आरोप लगाया कि पत्नी उसे शारीरिक बनावट को लेकर ‘सांवला और मोटा’ कहकर मानसिक रूप से प्रताड़ित करती थी। इसके अलावा, जुड़वां बच्चों का गर्भपात होने के बाद पत्नी अपने मायके (रायगढ़) चली गई और वापस नहीं लौटी।
पत्नी का पक्ष: पति के अन्य महिला से संबंध और प्रताड़ना का आरोप
दूसरी ओर, पत्नी पूजा ने पति के सभी आरोपों को खारिज कर दिया। उसने अदालत के सामने अपना पक्ष रखते हुए आरोप लगाया कि उसके पति का किसी अन्य महिला के साथ संबंध था। इस बात का खुलासा होने पर पति शराब पीकर उसके साथ मारपीट व दुर्व्यवहार करने लगा।
गर्भावस्था के दौरान भी उचित देखभाल न मिलने के कारण उसकी मां उसे इलाज के लिए रायगढ़ ले गई थी। ठीक होने के बाद जब उसने वापस आने की इच्छा जताई, तो ससुराल पक्ष के लोगों ने उसे वापस ले जाने से इनकार कर दिया। इस मामले में पत्नी की ओर से रायगढ़ में घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत मामला भी दर्ज कराया गया है, जो अभी लंबित है।
हाईकोर्ट की टिप्पणी: केवल आरोपों से क्रूरता साबित नहीं होती
मामले की सुनवाई जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने की। कोर्ट ने परिवार न्यायालय, जांजगीर के 28 अगस्त 2024 के फैसले को सही ठहराते हुए 18 सितंबर 2026 को पति की अपील खारिज कर दी।
डिवीजन बेंच ने अपने आदेश में कहा:
साक्ष्यों का अभाव: पति की ओर से क्रूरता और परित्याग (Desertion) के जो आरोप लगाए गए हैं, उन्हें साबित करने के लिए पर्याप्त और विश्वसनीय सबूत पेश नहीं किए गए।
शारीरिक टिप्पणी पर कोर्ट: पत्नी द्वारा पति को ‘सांवला और मोटा’ कहे जाने के कथित व्यवहार को इस मामले की परिस्थितियों में तलाक का आधार बनने लायक ‘कानूनी क्रूरता’ नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने दोहराया कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 के तहत तलाक का आदेश प्राप्त करने के लिए आरोपों का केवल मौखिक होना काफी नहीं है, बल्कि उन्हें अदालत में ठोस साक्ष्यों से साबित करना अनिवार्य है।





