नुआखाई जुहार! प्राइम सी 24 न्यूज की ओर से आप सभी को नुआखाई पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं, जानिए इस महापर्व का महत्व और परंपरा 🌾

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

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🌾 नुआखाई जुहार! प्राइम सी 24 न्यूज की ओर से आप सभी को नुआखाई पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं, जानिए इस महापर्व का महत्व और परंपरा 🌾

 

आज पूरा देश, विशेषकर पश्चिमी ओडिशा और छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाके, कृषि और आस्था के महापर्व ‘नुआखाई’ के रंग में रंगा हुआ है। खेतों में लहराती नई फसल के स्वागत और धरती मां के प्रति आभार प्रकट करने का यह उत्सव बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है।

प्राइम सी 24 न्यूज अपने सभी दर्शकों, पाठकों और देशवासियों को इस पावन कृषि उत्सव ‘नुआखाई’ की आत्मीय शुभकामनाएं देता है। हम कामना करते हैं कि मां समलेश्वरी आपके जीवन में सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद दें।

क्या है नुआखाई? जानिए इसका महत्व

‘नुआखाई’ दो शब्दों से मिलकर बना है— ‘नुआ’ (नया) और ‘खाई’ (खाना)। सरल शब्दों में इसका अर्थ है ‘नई फसल का अन्न ग्रहण करना’। जब खेतों में धान की फसल पककर तैयार हो जाती है, तब किसान अपनी पहली कटी हुई फसल (नवान्न) को सबसे पहले अपने क्षेत्र की कुलदेवी या देवता को अर्पित करते हैं।

यह त्योहार केवल अनाज खाने का उत्सव नहीं है, बल्कि यह हमारे अन्नदाताओं (किसानों) के कठिन परिश्रम के सम्मान और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता जताने का महापर्व है।

नुआखाई की प्रमुख परंपराएं और अनुष्ठान

नवान्न अर्पण (पहला भोग): तय शुभ मुहूर्त (लगन) के अनुसार, पश्चिमी ओडिशा की प्रसिद्ध अधिष्ठात्री देवी मां समलेश्वरी को नए धान से तैयार ‘नवान्न’ (खीर या दलिया) का भोग लगाया जाता है। इसके बाद लोग अपने-अपने घरों में कुलदेवी की पूजा करते हैं।

नुआखाई जुहार (बड़ों का आशीर्वाद): पूजा संपन्न होने के बाद परिवार के सभी सदस्य मिलकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। इसके बाद ‘नुआखाई जुहार’ की बेहद खूबसूरत परंपरा निभाई जाती है। घर के छोटे सदस्य अपने से बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लेते हैं और हमउम्र एक-दूसरे को गले लगाकर बधाई देते हैं।

सामूहिक भोज और सांस्कृतिक रंग: इस दिन दूर-दराज रहने वाले लोग भी अपने घर लौट आते हैं। शाम को गांवों और शहरों में पारंपरिक लोक नृत्यों (जैसे संबलपुरी डालखाई और रसबती) की धूम रहती है।

एकता और भाईचारे का संदेश

नुआखाई पर्व का सबसे सुंदर पहलू यह है कि यह समाज से हर तरह के ऊंच-नीच, जाति-पाति के भेदभाव को मिटाकर सबको एक सूत्र में पिरोता है। इस दिन पुराने गिले-शिकवे भुलाकर लोग एक-दूसरे के घर जाते हैं और जुहार करते हैं।

“प्राइम सी 24 न्यूज एक बार फिर मां समलेश्वरी से प्रार्थना करता है कि हमारे किसानों के घर हमेशा अन्न-धन से भरे रहें और हर परिवार में खुशहाली आए। आप सभी को ‘नुआखाई जुहार’!”