रिटायरमेंट से ठीक पहले मिलेगी राहत: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, आबकारी हेड कांस्टेबल नेल्सन लवेट को 15 दिन में बिलासपुर में पोस्टिंग देने का आदेश

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

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रिटायरमेंट से ठीक पहले मिलेगी राहत: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, आबकारी हेड कांस्टेबल नेल्सन लवेट को 15 दिन में बिलासपुर में पोस्टिंग देने का आदेश

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने आबकारी विभाग के हेड कांस्टेबल नेल्सन लवेट की याचिका पर सुनवाई करते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता को उनके गृह जिले बिलासपुर में पोस्टिंग दी जाए और आदेश की प्रति प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किया जाए।

यह मामला न्यायमूर्ति बिभू दत्ता गुरु की एकल पीठ (सिंगल बेंच) के समक्ष सुनवाई के लिए आया था।

क्या है पूरा मामला?

याचिकाकर्ता नेल्सन लवेट वर्तमान में रायगढ़ जिले में आबकारी हेड कांस्टेबल के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने रायगढ़ से अपने गृह जिले बिलासपुर में स्थानांतरण और वर्ष 2025 की ट्रांसफर पॉलिसी के क्लॉज 3.12 के तहत लाभ दिए जाने की मांग को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

नेल्सन लवेट की नियुक्ति 19 अप्रैल 1993 को आबकारी विभाग में सेल्समैन के तौर पर हुई थी। बाद में सेवा नियमित होने पर उन्हें आबकारी आरक्षक बनाया गया। साल 2014 में उनका तबादला कोरबा से बिलासपुर हुआ था, जिसके बाद 24 जून 2022 को उन्हें बिलासपुर से रायगढ़ भेज दिया गया। वर्ष 2023 में पदोन्नति पाकर वे आबकारी हेड कांस्टेबल बने और रायगढ़ में ही अपनी सेवाएं दे रहे थे।

पारिवारिक स्थिति और सेवानिवृत्ति का दिया हवाला

याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष अपनी स्थिति रखते हुए बताया कि वे जुलाई 2027 में सेवानिवृत्त (रिटायर) होने वाले हैं। इसके अलावा उनकी पत्नी का स्वास्थ्य भी खराब रहता है और उनका निरंतर इलाज चल रहा है। गृह जिले में पोस्टिंग के लिए उन्होंने विभाग के समक्ष कई बार आवेदन दिए, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई निर्णय नहीं लिया गया।

राज्य सरकार का तर्क

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि 5 जून 2025 की स्थानांतरण नीति आबकारी विभाग पर प्रभावी नहीं होती है, क्योंकि इस नीति से पुलिस, आबकारी, परिवहन, वाणिज्यिक कर और शिक्षा विभाग को अलग रखा गया है। सरकार ने यह भी पक्ष रखा कि किसी भी शासकीय कर्मचारी का अपनी पसंद की जगह पर पोस्टिंग पाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं बनता।

हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी और अंतिम निर्णय

माननीय उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार की इन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता अपनी सेवानिवृत्ति के निकट हैं और वे लंबे समय से गृह जिले में पदस्थापना की गुहार लगा रहे हैं। जब विभिन्न विभागों में एक वर्ष के भीतर सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को उनकी पसंद या गृह जिले में पोस्टिंग का लाभ दिया जाता है, तो याचिकाकर्ता को इससे वंचित रखना न्यायसंगत नहीं है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि ‘ट्रांसफर पॉलिसी का क्लॉज 3.12 लागू न होने’ की आड़ लेना उचित नहीं है। याचिका को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने संबंधित सक्षम अधिकारी को निर्देश दिया कि मामले पर विचार कर अगले 15 दिनों के भीतर नेल्सन लवेट की बिलासपुर में पोस्टिंग का आदेश अनिवार्य रूप से जारी करें।