छत्तीसगढ़ पुलिस का हाईटेक अवतार: अब गंध से पकड़े जाएंगे शराबी ड्राइवर, नो-पार्किंग पर भी ‘स्मार्ट’ शिकंजा
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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छत्तीसगढ़ पुलिस का हाईटेक अवतार: अब गंध से पकड़े जाएंगे शराबी ड्राइवर, नो-पार्किंग पर भी ‘स्मार्ट’ शिकंजा
रायपुर/ छत्तीसगढ़ की सड़कों पर रफ्तार और नशे के घातक मेल को रोकने के लिए राज्य पुलिस अब आधुनिक संसाधनों से लैस होकर मैदान में उतर रही है। यातायात नियमों की अनदेखी करने वालों और शराब पीकर वाहन चलाने वालों (ड्रंक एंड ड्राइव) पर लगाम कसने के लिए पुलिस ने ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई है।
बिना फूंक मारे खुलेगा राज
पुलिस ने ऐसी एडवांस ब्रीद एनालाइजर मशीनें शामिल की हैं जिनमें ‘स्मेल डिटेक्शन’ (गंध पहचानने) की क्षमता है।
तकनीक: अब चालक को मशीन में फूंक मारने की जरूरत नहीं होगी; केवल गंध मात्र से ही मशीन नशे की पुष्टि कर देगी।
फायदा: इससे चेकिंग की प्रक्रिया तेज होगी और संदिग्धों की पहचान करना आसान हो जाएगा।
नो-पार्किंग की समस्या का ‘लॉक’ समाधान
शहरों में बेतरतीब पार्किंग और जाम की समस्या से निपटने के लिए पुलिस ने बड़ी संख्या में व्हील लॉक खरीदे हैं।
कार्रवाई: नो-पार्किंग जोन में खड़े वाहनों को मौके पर ही लॉक कर दिया जाएगा।
जुर्माना: वाहन मालिक को निर्धारित जुर्माना भरने के बाद ही लॉक से मुक्ति मिलेगी।
सख्ती के आंकड़े और आगामी योजना
अभियान का असर: हाल ही में रायपुर में एक ही रात में 132 से अधिक शराबी वाहन चालक पकड़े गए।
कड़ी सजा: पुलिस अब केवल चालान तक सीमित नहीं है; बार-बार नियम तोड़ने वालों के ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड या कैंसिल करने के लिए परिवहन विभाग को अनुशंसा भेजी जा रही है।
निगरानी: राज्य में 15 नई हाई-टेक इंटरसेप्टर गाड़ियां भी तैनात की गई हैं, जो ओवर-स्पीडिंग और नशे में ड्राइविंग की 360-डिग्री कैमरों से निगरानी कर रही हैं।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इन आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से न केवल सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि नागरिकों में यातायात नियमों के प्रति जिम्मेदारी का भाव भी बढ़ेगा।





