बाबा रामदेव का बड़ा बयान: ‘देश में न हिंदू न मुसलमान, भारतीय बचपन खतरे में है’
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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बाबा रामदेव का बड़ा बयान: ‘देश में न हिंदू न मुसलमान, भारतीय बचपन खतरे में है’
रायपुर: भोपाल से देहरादून जाते समय मौसम खराब होने के कारण योग गुरु बाबा रामदेव ने रविवार को राजधानी रायपुर में रात्रि विश्राम किया। सोमवार सुबह देहरादून रवाना होने से पहले रायपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से मुखातिब होते हुए उन्होंने देश की मौजूदा परिस्थितियों, शिक्षा-चिकित्सा व्यवस्था और राष्ट्रहित से जुड़े कई अहम मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी।
‘जाति या धर्म नहीं, देश का बचपन और जवानी खतरे में’
देश में जारी राजनीतिक और सामाजिक बहसों पर प्रतिक्रिया देते हुए बाबा रामदेव ने कहा, “देश में न हिंदू खतरे में है, न मुसलमान, न क्षत्रिय और न ही ब्राह्मण। वास्तव में खतरे में भारतीय बचपन, देश की जवानी, वर्तमान और भविष्य है।” उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि कुछ लोग अपने आंदोलनों के लिए देश के बचपन का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए आंदोलन होना चाहिए, लेकिन इसके नाम पर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ गलत है।
राष्ट्रगीत विवाद पर बोले: ‘राष्ट्रहित सर्वोपरि, राजनीति न हो’
कांग्रेस नेतृत्व पर राष्ट्रगीत के अपमान के आरोपों और उस पर जारी राजनीति से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि उन्होंने संबंधित वीडियो अभी नहीं देखा है। लेकिन वंदे मातरम, देश की एकता और अखंडता ऐसे विषय हैं जिन पर पूरे देश को एक होना चाहिए। राष्ट्रहित और राष्ट्रधर्म को सर्वोपरि बताते हुए उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर राजनीति बिल्कुल नहीं होनी चाहिए।
प्रधानमंत्री और देश की व्यवस्था पर संतुलित दृष्टिकोण
देश की मौजूदा स्थिति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कामकाज पर विचार व्यक्त करते हुए बाबा रामदेव ने कहा, “केवल एक प्रधानमंत्री पूरा देश ठीक कर देंगे, यह अपेक्षा रखना भी उचित नहीं है।”
उन्होंने एक संतुलित सोच अपनाने पर जोर देते हुए कहा:
पीएम मोदी की नीतियों से देश में बहुत कुछ अच्छा हुआ है।
जो लोग यह कहते हैं कि देश में कुछ भी अच्छा नहीं हुआ, वे गलत हैं।
जो यह दावा करते हैं कि सब कुछ सही हो चुका है, वे भी गलत हैं।
हमें हमेशा न्यायपूर्ण और निष्पक्ष दृष्टि से स्थिति को देखना चाहिए।
शिक्षा और स्वास्थ्य सुधार के लिए दिया ‘मास्टर फार्मूला’
शिक्षा के बढ़ते व्यवसायीकरण और चिकित्सा व्यवस्था के समक्ष चुनौतियों पर बात करते हुए उन्होंने एक कड़ा सुझाव दिया। बाबा रामदेव ने कहा कि यदि देश में सरकारी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारना है, तो सरकारी तंत्र (नौकरी या सुविधाओं) का लाभ उठाने वाले सभी लोगों के बच्चों के लिए सरकारी स्कूलों में पढ़ना और सरकारी अस्पतालों में इलाज कराना अनिवार्य किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश के सामने केवल नौकरियों की ही समस्या नहीं है, बल्कि पर्यावरण जैसे अन्य गंभीर मुद्दे भी हैं। व्यवस्था में सुधार के लिए केवल सरकार के भरोसे रहने के बजाय समाज के हर व्यक्ति को मिलकर पुरुषार्थ करने की आवश्यकता है।





