पवित्र सावन मास की शुरुआत: आस्था, उमंग और शिव भक्ति के रंग में रंगा देश भोले की भक्ति में डूबा देश, शिवालयों में उमड़ा जनसैलाब
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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पवित्र सावन मास की शुरुआत: आस्था, उमंग और शिव भक्ति के रंग में रंगा देश भोले की भक्ति में डूबा देश, शिवालयों में उमड़ा जनसैलाब
रायपुर।आज से हिंदू धर्म के सबसे पवित्र महीनों में से एक, सावन (श्रावण) मास की आधिकारिक शुरुआत हो चुकी है। सुबह से ही देश भर के प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंगों और स्थानीय शिवालयों में ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयकारे गूंज रहे हैं। श्रद्धालु लंबी कतारों में लगकर शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित कर रहे हैं।

🔱 सावन मास का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सावन का महीना भगवान शिव को सबसे प्रिय है।समुद्र मंथन की कथा: इसी महीने में समुद्र मंथन से निकले विष को शिव जी ने अपने कंठ में समाहित किया था। विष की तपन को शांत करने के लिए देवताओं ने उन पर जल अर्पित किया था, तभी से सावन में जल चढ़ाने की परंपरा है।माता पार्वती की तपस्या: माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए सावन के महीने में ही कठोर तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर शिव जी ने उन्हें दर्शन दिए थे।

🏃♂️ कांवड़ यात्रा की धूम और प्रशासनिक तैयारियां
सावन शुरू होते ही पवित्र कांवड़ यात्रा का भी आगाज हो गया है। लाखों की संख्या में कांवड़िया हरिद्वार, सुल्तानगंज और अन्य पवित्र नदियों से गंगाजल लेकर अपने आराध्य का जलाभिषेक करने पैदल निकल पड़े हैं।सुरक्षा के कड़े इंतजाम: कांवड़ मार्गों पर सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन से निगरानी रखी जा रही है।भक्तों के लिए सुविधाएं: जगह-जगह चिकित्सा शिविर, विश्राम गृह और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की गई है।
ट्रैफिक डायवर्जन: कांवड़ियों की सुरक्षा के लिए कई प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर रूट डायवर्ट किए गए हैं।
📅 इस बार सावन में बन रहे हैं विशेष संयोग
ज्योतिषविदों के अनुसार, इस साल का सावन कई मायनों में बेहद खास है। इस महीने में कई दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहे हैं, जो जातकों की मनोकामनाएं पूरी करने के लिए उत्तम माने जा रहे हैं। सावन के सभी सोमवार को व्रत रखने का विशेष महत्व है, जिसे ‘सोलह सोमवार’ के व्रत की शुरुआत के लिए भी सबसे अच्छा समय माना जाता है।
🌱 प्रकृति का सौंदर्य और लोक उत्सव
सावन सिर्फ धार्मिक आस्था का ही नहीं, बल्कि प्रकृति के उत्सव का भी महीना है। चिलचिलाती गर्मी के बाद झमाझम बारिश से धरती हरी-भरी हो जाती है। इस महीने में हरियाली तीज और रक्षाबंधन जैसे प्रमुख त्योहार भी मनाए जाते हैं, जो आपसी प्रेम और भाईचारे का प्रतीक हैं।





