रायगढ़ में हाथियों का तांडव: 16 किसानों की धान फसल तबाह, दो वन मंडलों में 130 हाथियों के जमावड़े से ग्रामीणों में दहशत

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

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रायगढ़ में हाथियों का तांडव: 16 किसानों की धान फसल तबाह, दो वन मंडलों में 130 हाथियों के जमावड़े से ग्रामीणों में दहशत

रायगढ़/धरमजयगढ़:छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में हाथियों की धमक से वनांचल इलाकों में हड़कंप मचा हुआ है। सूरज ढलते ही हाथियों के दल रिहाइशी इलाकों और खेतों का रुख कर रहे हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। जिले के रायगढ़ और धरमजयगढ़ वन मंडल के अलग-अलग क्षेत्रों में हाथियों ने एक ही रात में 16 किसानों की धान की खड़ी फसल को रौंदकर पूरी तरह बर्बाद कर दिया है।

कहाँ-कहाँ मचा हाथियों का उत्पाद?

हाथियों के दल ने जिले के विभिन्न रेंजों में जमकर तबाही मचाई है:

तमनार रेंज (सामारूमा गांव): यहाँ हाथियों ने 5 किसानों की फसलों को तहस-नहस कर दिया।

घरघोड़ा रेंज (कमतरा): एक किसान की तैयार धान की फसल को भारी नुकसान पहुँचाया।

धरमजयगढ़ मंडल (नलकालो क्षेत्र): किसान कुसुम और श्रवण कुमार के खेतों में घुसकर फसल चट कर गए।

प्रेमनगर एवं मेढरमार क्षेत्र: विजय राय, चैतराम, रत्थूलाल और दिलीप की मेहनत पर हाथियों ने पानी फेर दिया।

लैलूंगा एवं गमेकेला क्षेत्र: प्रशांत भगत, खेमचंद, मूसतराम और लालोनी शर्मा की धान फसल को बुरी तरह रौंद दिया गया।

घटना के तुरंत बाद वन विभाग की टीम हरकत में आई और प्रभावित खेतों में पहुँचकर नुकसान का आकलन (सर्वे) शुरू कर दिया है, ताकि पीड़ित किसानों को जल्द राहत राशि दी जा सके।

130 हाथियों की मौजूदगी से बढ़ा खतरा

वन विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में रायगढ़ और धरमजयगढ़ वन मंडल के जंगलों में कुल 130 हाथी डेरा डाले हुए हैं। इसमें 39 नर, 62 मादा और 29 शावक शामिल हैं। शावकों की मौजूदगी के कारण हाथियों का दल बेहद आक्रामक और संवेदनशील मूड में है, जिससे जनहानि का खतरा और बढ़ गया है।

सर्तकता अलर्ट: गांवों में कराई जा रही मुनादी

हाथियों की आवाजाही को देखते हुए वन विभाग का ‘हाथी मित्र दल’ और ट्रेकर्स चौबीसों घंटे हाथियों की लोकेशन पर नजर बनाए हुए हैं। विभाग द्वारा प्रभावित ग्रामीण इलाकों में मुनादी करवाकर लोगों को अलर्ट किया जा रहा है:

शाम और रात के समय सावधान रहें: ग्रामीणों को हिदायत दी गई है कि वे अंधेरा होने के बाद जंगलों या खेतों की ओर अकेले न जाएं।

टकराव से बचें: हाथियों को उकसाने या उनके करीब जाकर फोटो-वीडियो बनाने से साफ मना किया गया है ताकि किसी भी तरह की जनहानि को रोका जा सके।