राजनांदगांव में 10 साल पुराने गोलीकांड पर बड़ा फैसला: मुंकू नेपाली समेत 3 को सश्रम उम्रकैद, 1 आरोपी बरी
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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राजनांदगांव में 10 साल पुराने गोलीकांड पर बड़ा फैसला: मुंकू नेपाली समेत 3 को सश्रम उम्रकैद, 1 आरोपी बरी
राजनांदगांव:वर्ष 2016 में कोर्ट परिसर से लौट रहे युवक घनश्याम विश्वकर्मा पर हुए जानलेवा हमले और गोलीबारी के चर्चित मामले में अदालत ने 10 साल बाद ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ज्योति अग्रवाल की अदालत ने मुख्य शूटर नितिन लिम्बो उर्फ ‘मुंकू नेपाली’ समेत तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सश्रम आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है। वहीं, पनाह देने के आरोपी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया है।
2016 का चर्चित गोलीकांड: कोर्ट से लौटते ही घेरा था
जिला लोक अभियोजक राजेश खांडेकर एवं अतिरिक्त लोक अभियोजक विनोद कुमार बाजपेयी के अनुसार, घटना 21 नवंबर 2016 की दोपहर लगभग 4:15 बजे की है। पीड़ित घनश्याम विश्वकर्मा अपने साथी दीपक राजपूत के साथ अदालत में पेशी भुगतकर बाइक से घर लौट रहे थे।
जैसे ही वे इंदिरा नगर चौक के पास पहुँचे, आरोपियों ने साजिश के तहत उन्हें रास्ते में ही घेर लिया। पुरानी रंजिश या हत्या की नीयत से मुंकू नेपाली ने देशी कट्टे से घनश्याम पर फायर कर दिया। गोली घनश्याम के दाहिने कंधे के पीछे लगी, जिससे वे खून से लथपथ होकर गिर पड़े। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मामले की शिकायत बसंतपुर थाने में दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद पुलिस ने नाकाबंदी कर देशी कट्टा और कार समेत आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
किस आरोपी को क्या मिली सजा?
अदालत ने तीनों मुख्य आरोपियों को भारतीय दंड संहिता (IPC) और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी करार दिया:

नितिन लिम्बो उर्फ मुंकू नेपाली (40 वर्ष, गौरीनगर):
धारा 307/34 व 120-बी/34 IPC: सश्रम उम्रकैद और ₹10,000 का कुल जुर्माना।
आर्म्स एक्ट (धारा 25 व 27): देशी कट्टा रखने व चलाने के जुर्म में 7 साल की अतिरिक्त सश्रम सजा व जुर्माना।

दिनेश कुमार माहेश्वरी उर्फ गोलू मारवाड़ी (43 वर्ष, किलापारा):
धारा 307/34 व 120-बी/34 IPC: साजिश रचने व हमले में शामिल होने पर सश्रम उम्रकैद और ₹10,000 जुर्माना।

भरत साहू (53 वर्ष, बसंतपुर):
धारा 307/34 व 120-बी/34 IPC: हत्या के प्रयास और आपराधिक षड्यंत्र में दोषी पाते हुए सश्रम उम्रकैद और ₹10,000 जुर्माना।
सबूतों के अभाव में एक आरोपी बरी
इस मामले में भिलाई (शास्त्री नगर) निवासी विनोद यादव (45 वर्ष) पर मुख्य आरोपियों को वारदात के बाद अपने घर में छिपाने और शरण देने का आरोप था। हालाँकि, अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत पेश करने में विफल रहा, जिसके चलते कोर्ट ने उन्हें ससम्मान बरी कर दिया।





