सूरजपुर में हाथी के हमले से ग्रामीण की मौत, शव सड़क पर रख अंबिकापुर-बनारस मार्ग जाम; 20 लाख मुआवजे और नौकरी की मांग पर अड़े उग्र ग्रामीण

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

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सूरजपुर में हाथी के हमले से ग्रामीण की मौत, शव सड़क पर रख अंबिकापुर-बनारस मार्ग जाम; 20 लाख मुआवजे और नौकरी की मांग पर अड़े उग्र ग्रामीण

 

 

प्रतापपुर (सूरजपुर): प्रतापपुर वन परिक्षेत्र के ग्राम सरहरी में हाथी के हमले से एक ग्रामीण की दर्दनाक मौत के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई है। घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने गुरुवार सुबह से ही शव को सड़क पर रखकर अंबिकापुर-बनारस मुख्य मार्ग पर पोड़ी मोड़ के पास चक्काजाम कर दिया है। सुबह 9 बजे से जारी इस विरोध प्रदर्शन के कारण मार्ग के दोनों ओर यात्री बसों और मालवाहक वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं, जिससे राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
साइकिल/बाइक से लौटते वक्त हुआ सामना
जानकारी के मुताबिक, ग्राम सिंघरा निवासी रामलाल (50) बुधवार को किसी काम से ग्राम सरहरी गए हुए थे। शाम को मोटरसाइकिल से घर लौटते समय अचानक उनका सामना एक दल से बिछड़े हाथी से हो गया। हाथी ने हमला कर रामलाल को बेरहमी से कुचल दिया, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। हाथी ने उनकी मोटरसाइकिल को भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया।
प्रशासनिक आश्वासन दरकिनार, मांग पर अड़े ग्रामीण
गुरुवार सुबह ग्रामीणों ने वन विभाग की वादाखिलाफी और इलाके में हाथियों के आतंक से तंग आकर मुख्य मार्ग को ठप कर दिया। ग्रामीणों की दो मुख्य मांगें हैं:
मृतक के आश्रितों को 20 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान किया जाए।
परिवार के दो सदस्यों को वन विभाग में स्थायी नौकरी दी जाए।
मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच लंबी वार्ता हुई। प्रशासन ने शासन के नियमानुसार 6 लाख रुपये की तात्कालिक मुआवजा राशि और परिवार के दो सदस्यों को दैनिक वेतन भोगी (रोजंदार) के रूप में काम देने का प्रस्ताव रखा। साथ ही अतिरिक्त मुआवजे के लिए शासन को पत्र भेजने का आश्वासन दिया, लेकिन उग्र ग्रामीण इस पर सहमत नहीं हुए और खबर लिखे जाने तक चक्काजाम जारी था।
प्रतापपुर क्षेत्र में लगातार मंडरा रहा खतरा
गौरतलब है कि प्रतापपुर वन परिक्षेत्र हाथियों के अनुकूल वातावरण के कारण उनका स्थाई ठिकाना बन चुका है। यहां साल भर हाथियों की आवाजाही बनी रहती है, जिससे आए दिन जन-धन की हानि हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग हाथियों के लोकेशन की सही जानकारी देने और सुरक्षा इंतजामों में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है।