रायपुर से देश का सबसे बड़ा ‘E-20 पेट्रोल विवाद’: उपभोक्ता कोर्ट के फैसले को चुनौती देगी ऑटोमोबाइल जायंट मारुति सुजुकी, डॉक्टर की ‘ग्रैंड विटारा’ पर मचा बवाल!

 रायपुर से देश का सबसे बड़ा ‘E-20 पेट्रोल विवाद’: उपभोक्ता कोर्ट के फैसले को चुनौती देगी ऑटोमोबाइल जायंट मारुति सुजुकी, डॉक्टर की ‘ग्रैंड विटारा’ पर मचा बवाल!

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

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रायपुर से देश का सबसे बड़ा ‘E-20 पेट्रोल विवाद’: उपभोक्ता कोर्ट के फैसले को चुनौती देगी ऑटोमोबाइल जायंट मारुति सुजुकी, डॉक्टर की ‘ग्रैंड विटारा’ पर मचा बवाल!

 

रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से देश का एक बेहद संवेदनशील और अपनी तरह का पहला ‘E-20 पेट्रोल विवाद’ सामने आया है। इस मामले में देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है।

कंपनी रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के उस ऐतिहासिक आदेश को उचित उच्च मंच पर चुनौती देने जा रही है, जिसमें ग्राहक की गाड़ी बदलने या पूरे पैसे वापस करने का निर्देश दिया गया था।

कंपनी का दावा है कि उनके वाहन में कोई तकनीकी या निर्माण

गत खराबी नहीं थी, बल्कि ग्राहक की कार से मिले ईंधन (पेट्रोल) में मिलावट के स्पष्ट सबूत हैं।

आइए जानते हैं क्या है यह पूरा मामला और क्यों इस पर देशव्यापी बहस छिड़ गई है।

क्या था उपभोक्ता फोरम का ऐतिहासिक फैसला

सड्डू (रायपुर) निवासी डॉ. प्रेमराज देवता की शिकायत पर सुनवाई करते हुए रायपुर जिला उपभोक्ता फोरम ने मारुति सुजुकी को एक बड़ा झटका दिया था। आयोग ने कंपनी को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि वह:या तो 45 दिनों के भीतर ग्राहक को ई-20 ईंधन के पूरी तरह अनुकूल (Compatible) नई ग्रैंड विटारा कार सौंपे। या फिर कार की खरीद की पूरी रकम ग्राहक को वापस करे।कैसे शुरू हुआ विवाद?

डॉ. देवता की आपबीती

3 जून 2024: डॉ. प्रेमराज देवता ने मारुति सुजुकी की प्रीमियम एसयूवी ‘ग्रैंड विटारा’ (Grand Vitara) खरीदी।11 नवंबर 2024: महज कुछ ही महीनों बाद चलती कार में अचानक गंभीर तकनीकी खराबी आ गई।

वर्कशॉप का दावा: जब गाड़ी को आधिकारिक मारुति वर्कशॉप ले जाया गया, तो मैकेनिक्स ने खराबी का कारण मिलावटी पेट्रोल बताया। टैंक साफ करने और बार-बार रिपेयरिंग के बाद भी कार लगातार चोक और खराब होती रही।

कंपनी का इनकार: डीलर और निर्माता कंपनी दोनों ने ही गाड़ी में किसी भी तरह के मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट (निर्माणगत त्रुटि) होने से साफ मना कर दिया।

एसजीएस लैब की रिपोर्ट ने पलटा पूरा मामला

बार-बार की परेशानी और कंपनी के अड़ियल रवैये से तंग आकर डॉ. देवता ने पेट्रोल का सैंपल लिया और देश की मान्यता प्राप्त एसजीएस (SGS) लैब में जांच के लिए भेजा।

चौंकाने वाला खुलासा: लैब रिपोर्ट में सामने आया कि पेट्रोल मिलावटी या गुणवत्ताहीन नहीं था।

इंजन मिसमैच: समस्या यह थी कि पेट्रोल गाड़ी के इंजन के अनुकूल (कंफर्टेबल) नहीं था, जिसके कारण पेट्रोल सप्लाई चोक हो रही थी।

पेट्रोल पंप की दलील: जब पीड़ित ने संबंधित पेट्रोल पंप से संपर्क किया, तो पता चला कि वहां से ईंधन लेने वाले किसी अन्य वाहन मालिक ने ऐसी कोई शिकायत नहीं की थी।

मजबूरी में खटखटाया कोर्ट का दरवाजा

जब कार लगातार बंद रहने लगी और कंपनी ने इसकी री-सेल वैल्यू का मूल्यांकन महज ₹12 लाख लगाया, तो डॉ. देवता के पास कोई रास्ता नहीं बचा। उन्होंने आर्थिक और मानसिक प्रताड़ना के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में केस दायर कर दिया।

मारुति सुजुकी की दलील: कोर्ट के आदेश को देंगे चुनौती

उपभोक्ता फोरम के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए मारुति सुजुकी ने कहा, “हमें रायपुर उपभोक्ता आयोग के आदेश की जानकारी मिली है। हमारी जो कार ग्राहक ने खरीदी थी, वह पूरी तरह से ई-20 अनुकूल (E20 Compliant) है और ई-20 ईंधन पर चलने में पूरी तरह सक्षम है। ग्राहक की गाड़ी से निकाले गए ईंधन में मिलावट के साफ सबूत मिले हैं। आयोग ने कई महत्वपूर्ण और प्रासंगिक तथ्यों को अपने आदेश में शामिल नहीं किया है। इसलिए हम कानून के दायरे में रहकर उच्च फोरम में इस आदेश को चुनौती देने के लिए जरूरी कानूनी कदम उठा रहे हैं।”

क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?पूरे देश में इस समय केंद्र सरकार के एथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल (E-20) नीति को लागू किया जा रहा है। ऐसे में यह विवाद ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए एक बहुत बड़ा टर्निंग पॉइंट बन सकता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर नई गाड़ियों की एथेनॉल ईंधन क्षमता और तकनीकी दावों पर सवाल खड़े करता है।