पेपर लीक के खिलाफ फूटा गुस्सा: बस्तर NSUI ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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पेपर लीक के खिलाफ फूटा गुस्सा: बस्तर NSUI ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
जगदलपुर (बस्तर)।राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में हुए कथित फर्जीवाड़े, प्रश्न-पत्र लीक और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की विफलता के खिलाफ देशव्यापी गुस्से का असर बस्तर में भी देखने को मिला। बुधवार को भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) जिला बस्तर इकाई के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर उग्र प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के बाद छात्र नेताओं ने जिला कलेक्टर को राष्ट्रपति और केंद्र सरकार के नाम एक ज्ञापन सौंपा। एनएसयूआई ने दो टूक शब्दों में कहा कि देश के लाखों होनहार छात्रों के भविष्य को शिक्षा माफियाओं के हाथों नीलाम नहीं होने दिया जाएगा।’
सरकार के पास चुनाव प्रचार का वक्त, छात्रों की चीखें सुनने का नहीं’ज्ञापन सौंपने के दौरान एनएसयूआई नेता आदित्य सिंह बिसेन ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “एक तरफ सरकार विश्वगुरु बनने का ढिंढोरा पीट रही है, तो दूसरी तरफ देश के युवाओं को एक पारदर्शी परीक्षा प्रणाली तक देने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। इस सरकार के पास चुनाव प्रचार और रैलियों के लिए तो पर्याप्त समय है, लेकिन देश के करोड़ों परेशान छात्रों की चीखें सुनने की फुर्सत नहीं है।”
बस्तर के गरीब छात्रों के साथ हुआ धोखा:
विशाल खंबारी प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता विशाल खंबारी ने केंद्र सरकार और एनटीए को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि बस्तर जैसे सुदूर और आदिवासी अंचल का गरीब छात्र कर्ज लेकर, पेट काटकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करता है। सरकार उन्हें उनकी कड़ी मेहनत के बदले पेपर लीक की गारंटी दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधीशों ने पवित्र शिक्षा व्यवस्था को एक भ्रष्ट मंडी में तब्दील कर दिया है और एनटीए जैसी विफल संस्था पर पर्दा डालकर शिक्षा माफियाओं को खुला संरक्षण दिया जा रहा है।
एनएसयूआई की प्रमुख माँगें:
स्वतंत्र जाँच: नीट परीक्षा में हुई धांधली की सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) की निगरानी में निष्पक्ष व स्वतंत्र जाँच कराई जाए।रासुका के तहत कार्रवाई: घोटाले में संलिप्त बड़े शिक्षा माफियाओं और भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों को चिह्नित कर उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत सख्त कार्रवाई हो।अधिकारियों की जवाबदेही: परीक्षा की शुचिता और गोपनीयता बनाए रखने में पूरी तरह विफल रही एनटीए (NTA) की प्रशासनिक जवाबदेही तय की जाए।कड़े कानून: भविष्य में होने वाली सभी प्रतियोगी परीक्षाओं को सुरक्षित, पारदर्शी और लीक-प्रूफ बनाने के लिए एक सख्त प्रशासनिक रूपरेखा और कानून लागू किया जाए।
शासन-प्रशासन को खुली चेतावनी
एनएसयूआई ने शासन और प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि देश का युवा अब अपने अधिकारों को लेकर जागरूक हो चुका है। वे अपने भविष्य पर किसी भी तरह का डाका बर्दाश्त नहीं करेंगे। यदि छात्रों की इन जायज माँगों पर जल्द ही कोई त्वरित और ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो एनएसयूआई पूरे संभाग और प्रदेश स्तर पर एक विशाल जन आंदोलन खड़ा करेगी।
छात्र नेताओं ने स्पष्ट किया कि इस आंदोलन के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी कानून-व्यवस्था की स्थिति की संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।प्रदर्शन में ये रहे उपस्थित:इस विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान मुख्य रूप से विशाल खंबारी, माज लिल्लाह, शेख अयाज, पंकज केवट, हंशु नाग, दीपेश पांडेय, दक्ष साहू, अमन चंदेल, तनमय चौहान, समीर कुमार, वैभव पाणिग्रही और नितेश चंदेल सहित भारी संख्या में एनएसयूआई के कार्यकर्ता और छात्र उपस्थित थे।





