बालोद में ‘मय’ के लिए हाहाकार: सरकारी दुकानों के रैक खाली, पसंदीदा ब्रांड के लिए दर-दर भटक रहे ‘मधुशाला’ प्रेमी
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राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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बालोद में ‘मय’ के लिए हाहाकार: सरकारी दुकानों के रैक खाली, पसंदीदा ब्रांड के लिए दर-दर भटक रहे ‘मधुशाला’ प्रेमी
बालोद: छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में इन दिनों शराब की किल्लत ने ‘मधु’ प्रेमियों की रातों की नींद उड़ा दी है। जिले की सरकारी शराब दुकानों में स्टॉक की भारी कमी देखी जा रही है, जिसके चलते लोग एक दुकान से दूसरी दुकान के चक्कर काट रहे हैं। दुकानों के रैक खाली पड़े हैं और शराब प्रेमी अपने पसंदीदा ब्रांड के लिए भटकने को मजबूर हैं।
स्टॉक की कमी और सप्लाई में देरी
प्रदेश में हाल ही में लागू हुई नई शराब नीति के तहत कांच की बोतलों की जगह प्लास्टिक बोतलों में शराब की पैकिंग करने का फैसला लिया गया है। इस फैसले का बॉटलिंग एसोसिएशन और डिस्टलर्स कड़ा विरोध कर रहे हैं। इस विरोध प्रदर्शन के कारण शराब की सप्लाई काफी धीमी हो गई है, जिसका सीधा असर बालोद की दुकानों पर पड़ा है। विशेष रूप से ‘सस्ती शराब’ और लोकप्रिय ब्रांड्स का स्टॉक पूरी तरह खत्म हो चुका है।
शराब प्रेमियों का हाल: भटकने को मजबूर
दुकानदारों के पास पहुंचने वाले ग्राहकों को निराशा हाथ लग रही है। दुकानों के बाहर लंबी कतारों के बावजूद सेल्समैन ‘स्टॉक नहीं है’ कहकर ग्राहकों को लौटा रहे हैं। आलम यह है कि लोग जिला मुख्यालय से दूर ग्रामीण क्षेत्रों की दुकानों में जाकर स्टॉक तलाश रहे हैं, लेकिन वहां भी स्थिति लगभग समान बनी हुई है।
अवैध शराब और कोचियों का बढ़ा डर
शराब दुकानों में स्टॉक की कमी का फायदा अब ‘कोचिया’ (अवैध शराब बेचने वाले) उठाने लगे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब की बिक्री की शिकायतें पहले भी आती रही हैं। अब सरकारी दुकानों में कमी के कारण अवैध शराब की मांग बढ़ने और उसकी तस्करी की संभावना ने पुलिस और आबकारी विभाग की चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में जिले के कुछ गांवों में ग्रामीणों ने अवैध शराब के खिलाफ खुद मोर्चा संभालते हुए भारी जुर्माना लगाने का निर्णय भी लिया है।
आबकारी विभाग की चुप्पी
भले ही बालोद जिले सहित पूरे प्रदेश में शराब सप्लाई प्रभावित हुई है, लेकिन विभाग की ओर से स्थिति सामान्य होने के संबंध में अब तक कोई स्पष्ट तारीख नहीं दी गई है। फिलहाल शराब प्रेमियों को स्टॉक वापस आने के लिए आबकारी नीति और बॉटलिंग एसोसिएशन के बीच सुलह का इंतजार करना होगा।





