सुकमा में 8 लाख के इनामी 4 नक्सलियों का सरेंडर, ‘पूना मार्गेम’ अभियान से मिली बड़ी सफलता
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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सुकमा में 8 लाख के इनामी 4 नक्सलियों का सरेंडर, ‘पूना मार्गेम’ अभियान से मिली बड़ी सफलता
सुकमा: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में शुक्रवार को दो महिलाओं समेत चार सक्रिय माओवादियों ने सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। सरेंडर करने वाले इन नक्सलियों पर कुल 8 लाख रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस प्रशासन के अनुसार, इन नक्सलियों ने राज्य सरकार की ‘पूना मार्गेम’ (पुनर्वास से सामाजिक एकीकरण) पहल और विकास कार्यों से प्रभावित होकर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है।
इनामी नक्सलियों का विवरण
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली दक्षिण बस्तर डिवीजन की किस्ताराम एरिया कमेटी में सक्रिय थे:
सोढ़ी जोगा: एरिया कमेटी सदस्य (इनाम: 5 लाख रुपये)
डाबर गंगा उर्फ मडकम गंगा: सक्रिय सदस्य (इनाम: 1 लाख रुपये)
सोढ़ी राजे: महिला सदस्य (इनाम: 1 लाख रुपये)
माडवी बुधारी: महिला सदस्य (इनाम: 1 लाख रुपये)
हथियारों का जखीरा सौंपा
नक्सलियों ने केवल आत्मसमर्पण ही नहीं किया, बल्कि अपने साथ आधुनिक हथियार भी पुलिस के हवाले किए। बरामद हथियारों में एक इंसास राइफल, एक एसएलआर (SLR), एक .303 राइफल और एक .315 राइफल के साथ भारी मात्रा में गोला-बारूद शामिल है।
क्यों टूट रहा है ‘लाल आतंक’ का जाल?
पूछताछ में नक्सलियों ने बताया कि वे राज्य सरकार की पुनर्वास नीति और क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यों से प्रभावित हैं। अंदरूनी इलाकों (किस्टाराम और गोलापल्ली) में नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना और बेहतर सड़क कनेक्टिविटी के कारण नक्सलियों का आधार क्षेत्र सिमट गया है। शासन की योजनाओं की पहुंच ने ग्रामीणों और कैडरों के बीच संगठन के प्रति मोहभंग पैदा कर दिया है।
नक्सलवाद समाप्ति की ओर
केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2025 तक देश से नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने का लक्ष्य रखा है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर सरेंडर देखे जा रहे हैं। हाल ही में 15 जनवरी को बीजापुर में 52 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में अब तक 1,500 से अधिक नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में शामिल हो चुके हैं।












