छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से शुरू होगी धान खरीदी: ₹3100 समर्थन मूल्य पर प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदेगी सरकार; बायोमेट्रिक और एग्रीस्टैक अनिवार्य
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से शुरू होगी धान खरीदी: ₹3100 समर्थन मूल्य पर प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदेगी सरकार; बायोमेट्रिक और एग्रीस्टैक अनिवार्य
रायपुर / दुर्ग:छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए धान बिक्री को लेकर राज्य प्रशासन ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। आगामी 15 नवंबर से 31 जनवरी 2027 तक प्रदेश के उपार्जन केंद्रों में धान खरीदी की प्रक्रिया संचालित की जाएगी। दुर्ग में आयोजित पंडवानी महासम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आधिकारिक तौर पर इस तारीख की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार किसानों से 3,100 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य (MSP) पर धान का उपार्जन करेगी।
योजना के नियमों के अनुसार, पंजीकृत किसान अपनी कृषि भूमि से प्रति एकड़ अधिकतम 21 क्विंटल धान विक्रय कर सकेंगे।
160 लाख मीट्रिक टन का रिकॉर्ड लक्ष्य
कृषि क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने इस वर्ष 160 लाख मीट्रिक टन धान उपार्जन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष दर्ज की गई 140 लाख मीट्रिक टन की खरीदी से 20 लाख मीट्रिक टन अधिक है, जो प्रदेश में कृषि उत्पादन और सरकारी प्रोत्साहन के बढ़ते दायरे को दर्शाता है।
खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए लागू हुए सख्त नियम
उपार्जन प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुगमता बनाए रखने के लिए इस सत्र कई अहम तकनीकी व प्रक्रियात्मक व्यवस्थाएं लागू की गई हैं:
एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीयन अनिवार्य: किसानों के लिए एग्रीस्टैक पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया गया है। बिना पंजीयन के उपज की बिक्री संभव नहीं होगी।
टोकन व्यवस्था से नियंत्रण: केंद्रों पर अनावश्यक भीड़ और अफरा-तफरी से बचने के लिए टोकन प्रणाली लागू की गई है। किसानों को निर्धारित तिथि पर ही धान लेकर केंद्र पर पहुंचना होगा।
बायोमेट्रिक सत्यापन: वास्तविक किसान की पहचान सुनिश्चित करने और बिचौलियों को रोकने के लिए उपार्जन स्थल पर बायोमेट्रिक सत्यापन कराना अनिवार्य होगा।
17% से अधिक नमी पर धान होगा रिजेक्ट: गुणवत्ता मानकों का सख्ती से पालन किया जाएगा। यदि धान में नमी की मात्रा 17 प्रतिशत से अधिक पाई जाती है, तो उस खेप को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सरकार की इस घोषणा के बाद से प्रदेश के किसान भाइयों में भारी उत्साह है और प्रशासन उपार्जन केंद्रों में सभी तैयारियां पूरी करने में जुटा हुआ है।





