रायपुर एयरपोर्ट की जमीन पर ‘महादावा’: किसान पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, मांगा ₹3500 करोड़ का मुआवजा!
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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रायपुर एयरपोर्ट की जमीन पर ‘महादावा’: किसान पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, मांगा ₹3500 करोड़ का मुआवजा!
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट (माना) की जमीन को लेकर देश की सबसे बड़ी अदालत में एक अभूतपूर्व कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है. रायपुर के 53 वर्षीय किसान अश्विनी बांधे ने एयरपोर्ट परिसर की 34.35 हेक्टेयर (लगभग 30 एकड़) जमीन पर अपना पुश्तैनी अधिकार जताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है.
किसान ने इस बेशकीमती जमीन के बदले ₹3500 करोड़ के मुआवजे, बकाया किराए और ब्याज की मांग की है, जिसने पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है.
द्वितीय विश्व युद्ध से जुड़ा है 84 साल पुराना यह ‘राज’
किसान अश्विनी बांधे का दावा है कि जिस जमीन पर वर्तमान में एयरपोर्ट टर्मिनल और भव्य गार्डन बने हैं, वह उनके पूर्वजों की निजी संपत्ति थी. वर्ष 1942 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश हुकूमत ने डिफेंस ऑफ इंडिया एक्ट के तहत युद्धकालीन आपातकालीन जरूरतों को देखते हुए ‘माना एयरफील्ड’ के निर्माण के लिए यह जमीन ली थी.उस वक्त ब्रिटिश सरकार और किसान के पूर्वजों के बीच ₹1300 वार्षिक लीज (किराया) पर सहमति बनी थी और वादा किया गया था कि युद्ध समाप्त होने के बाद जमीन वापस कर दी जाएगी. लेकिन, न तो युद्ध के बाद जमीन लौटाई गई और न ही परिवार को कभी तय किराया या मुआवजा मिला.35 साल का संघर्ष,
₹20 करोड़ खर्च और फिर मिली ‘तस्वीर बदलने वाली’ कामयाबी
अश्विनी बांधे पिछले 35 वर्षों से इस हक की लड़ाई के लिए सरकारी दफ्तरों और अदालतों के चक्कर काट रहे हैं. इस लंबी कानूनी प्रक्रिया और दस्तावेज जुटाने में उनकी जमापूंजी के लगभग ₹20 करोड़ खर्च हो चुके हैं.इस मामले में नया मोड़ तब आया जब रायपुर में संस्कृति विभाग की एक ऐतिहासिक प्रदर्शनी में उन्हें 1942 के भूमि अधिग्रहण से जुड़े पुराने राजस्व दस्तावेज मिल गए. लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत इन प्रमाणित प्रतियों को निकालकर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में पेश किया है. इन सरकारी दस्तावेजों में माना एयरफील्ड के लिए बरौदा, रामचंडी और आसपास के गांवों की जमीन अधिग्रहित किए जाने का स्पष्ट उल्लेख है, जिससे किसान का पक्ष बेहद मजबूत नजर आ रहा है.
क्यों खास है यह मामला?दावे की रकम: ₹3500 करोड़ का यह दावा छत्तीसगढ़ के इतिहास के सबसे बड़े भूमि विवादों में से एक बन चुका है.अहम हिस्सा प्रभावित: इस विवाद के दायरे में वीआईपी एयरपोर्ट का मुख्य टर्मिनल और उसके सामने की जमीन आती है.अब गेंद सुप्रीम कोर्ट के पाले में: इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई इस बात का फैसला करेगी कि आजादी से पहले के वादे और दस्तावेज आज के आधुनिक भारत में क्या रुख अख्तियार करते हैं.अगर देश की सर्वोच्च अदालत किसान के पक्ष में फैसला सुनाती है, तो यह विमानन मंत्रालय और राज्य सरकार के लिए एक बड़ा कानूनी और वित्तीय झटका हो सकता है। फिलहाल, हर किसी की नजरें सुप्रीम कोर्ट में होने वाली इस ऐतिहासिक सुनवाई पर टिकी हैं.





