छत्तीसगढ़ सरकार के ‘नक्सल मुक्त’ दावों की खुली पोल, छोटेबेठिया मुठभेड़ ने खड़े किए गंभीर सवाल, पार्षद विजय साव
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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छत्तीसगढ़ सरकार के ‘नक्सल मुक्त’ दावों की खुली पोल, छोटेबेठिया मुठभेड़ ने खड़े किए गंभीर सवाल, पार्षद विजय साव
महासमुंद,आज कांकेर जिले के छोटेबेठिया थाना क्षेत्र के जंगलों में हुई ताजा मुठभेड़ ने प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था और सरकार के बड़े-बड़े दावों पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पार्षद विजय साव ने सरकार को आड़े हाथों लिया है।
विजय साव ने कहा, “अभी कुछ ही दिन पहले, 31 मार्च 2026 को बड़े तामझाम के साथ सरकार ने छत्तीसगढ़ को ‘नक्सल मुक्त’ घोषित करने का जश्न मनाया था। लेकिन आज छोटेबेठिया के जंगलों में माओवादियों की प्रतापपुर एरिया कमेटी की सदस्य ‘रूपी’ का मारा जाना और मौके से हथियारों की बरामदगी यह साबित करती है कि सरकार का वह घोषणा पत्र केवल एक चुनावी स्टंट और कागजी झूठ था।”
साव ने आगे कहा कि यदि राज्य वास्तव में नक्सल मुक्त हो चुका है, तो फिर ये हथियारबंद कैडर कहाँ से आ रहे हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अपनी विफलता को छिपाने और जनता को गुमराह करने के लिए जल्दबाजी में ‘नक्सल मुक्त’ होने का सर्टिफिकेट खुद को ही दे दिया
पार्षद विजय साव के प्रमुख सवाल:
जब 31 मार्च को राज्य नक्सल मुक्त घोषित हो गया, तो 13 अप्रैल को यह मुठभेड़ कैसे हुई?
क्या सरकार के पास खुफिया तंत्र की कमी है या जानबूझकर आंकड़ों को छुपाया जा रहा है?
जमीनी हकीकत जाने बिना ऐसी झूठी घोषणाएं कर जवानों की जान जोखिम में क्यों डाली जा रही है?
उन्होंने मांग की है कि सरकार अपनी इस विफलता की जिम्मेदारी ले विजय साव ने स्पष्ट कहा है की जब तक बस्तर और कांकेर के सुदूर अंचलों में बंदूकें गरज रही हैं, तब तक ‘नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़’ का दावा केवल एक क्रूर मजाक है।





