हूती विद्रोहियों की समुद्री केबल काटने की धमकी: भारत के 60% इंटरनेट ट्रैफिक पर खतरा, ठप हो सकती हैं बैंकिंग सेवाएं

 हूती विद्रोहियों की समुद्री केबल काटने की धमकी: भारत के 60% इंटरनेट ट्रैफिक पर खतरा, ठप हो सकती हैं बैंकिंग सेवाएं

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

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हूती विद्रोहियों की समुद्री केबल काटने की धमकी: भारत के 60% इंटरनेट ट्रैफिक पर खतरा, ठप हो सकती हैं बैंकिंग सेवाएं

नई दिल्ली: अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने अब डिजिटल दुनिया की कमर तोड़ने की दस्तक दे दी है। रेड सी (लाल सागर) और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हूती विद्रोहियों द्वारा अंडरसी केबल्स (समुद्री इंटरनेट केबल) को नुकसान पहुँचाने की धमकियों ने भारत समेत पूरी दुनिया के इंटरनेट बुनियादी ढांचे के लिए गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।

भारत पर सबसे बड़ा असर: 60% डेटा ट्रैफिक खतरे में

भारत के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि देश का लगभग 60% इंटरनेट डेटा ट्रैफिक ‘मुंबई-यूरोप’ रूट पर निर्भर है, जो इन्ही संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों से होकर गुजरता है। यदि इन केबल्स को नुकसान पहुँचता है, तो भारत में इंटरनेट की रफ्तार में भारी गिरावट आएगी।

बैंकिंग और डिजिटल सेवाएं हो सकती हैं प्रभावित

विशेषज्ञों के अनुसार, इंटरनेट कनेक्टिविटी बाधित होने का सीधा असर वित्तीय क्षेत्र पर पड़ेगा। डिजिटल भुगतान, नेट बैंकिंग, शेयर बाजार और अंतरराष्ट्रीय ट्रांजेक्शन में बड़ी बाधा आ सकती है। इसके अलावा, वर्क-फ्रॉम-होम और क्लाउड आधारित सेवाओं पर निर्भर आईटी सेक्टर को भी भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है।

एक्शन मोड में दूरसंचार विभाग (DoT)

इस संभावित ब्लैकआउट से निपटने के लिए भारत सरकार का दूरसंचार विभाग (DoT) सक्रिय हो गया है। विभाग वर्तमान में वैकल्पिक रूटों की तलाश कर रहा है ताकि यदि पश्चिमी रूट प्रभावित होता है, तो ट्रैफिक को पूर्वी देशों या अन्य सुरक्षित रास्तों से डायवर्ट किया जा सके। दूरसंचार कंपनियां भी अपने बैकअप प्लान और सैटेलाइट कनेक्टिविटी की संभावनाओं को टटोल रही हैं।

फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियां और अंतरराष्ट्रीय संगठन लाल सागर में इन ‘लाइफलाइन’ केबल्स की सुरक्षा को लेकर हाई अलर्ट पर हैं।