डीजल-खाद की महंगाई के सामने 72 रुपये की वृद्धि ऊँट के मुंह में जीरा, किसानों के साथ छलावा कर रही भाजपा सरकार: भरत बुंदेला।

 डीजल-खाद की महंगाई के सामने 72 रुपये की वृद्धि ऊँट के मुंह में जीरा, किसानों के साथ छलावा कर रही भाजपा सरकार: भरत बुंदेला।

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

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डीजल-खाद की महंगाई के सामने 72 रुपये की वृद्धि ऊँट के मुंह में जीरा, किसानों के साथ छलावा कर रही भाजपा सरकार: भरत बुंदेला।

महासमुंद,महासमुंद विधानसभा से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के आगामी प्रत्याशी और भरत ड्राईक्लीनर्स के संचालक भरत बुंदेला ने केंद्र की मोदी सरकार द्वारा धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में की गई 72 रुपये की वृद्धि को बेहद अपर्याप्त और किसानों के साथ भद्दा मजाक बताया है। उन्होंने कहा कि कृषि उपकरणों, डीजल और उर्वरकों के दामों में हुई बेतहाशा बढ़ोतरी के सामने यह वृद्धि पूरी तरह बेमानी है। ,

लागत के बोझ तले दबा किसान, वाहवाही लूटने में मस्त भाजपा

भरत बुंदेला ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि एक तरफ भाजपा सरकार धान के समर्थन मूल्य में महज 72 रुपये बढ़ाकर खुद को किसान हितैषी साबित करने का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं दूसरी तरफ कृषि में उपयोग होने वाली आवश्यक वस्तुओं जैसे डीजल, रासायनिक खाद, प्रमाणित बीज, सिंचाई और मजदूरी दर में लगातार वृद्धि कर रही है। इससे किसानों पर लागत का बोझ MSP से कहीं अधिक बढ़ गया है। भाजपा सरकार इन जमीनी हकीकतों पर चुप्पी साधकर केवल अपनी पीठ थपथपाने में लगी है।

हल-बैल का जमाना गया, डीजल की महंगाई ने तोड़ी, कमर

सत्तारूढ़ नेताओं पर तंज कसते हुए बसपा नेता ने कहा कि सत्ताधीशों को शायद जमीनी हकीकत का अंदाजा नहीं है। आज के दौर में बड़े किसानों के साथ-साथ मध्यम और छोटे रकबे के किसान भी हल-बैल के बजाय डीजल चलित मशीनों को किराए पर लेकर धान की बोआई, कटाई और मिंजाई का कार्य करते हैं। डीजल की अनियंत्रित कीमतों और आसमान छूती महंगाई के कारण फसल की पूरी प्रक्रिया में इतना खर्च हो जाता है कि सब चुकाने के बाद किसान के हाथ में एक मामूली रकम ही बचती है। यह रकम उनके छह महीने के कड़े श्रम की वास्तविक कीमत से बेहद कम है।

MSP वृद्धि सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए, कांग्रेस सरकार से की तुलना

भरत बुंदेला ने दो टूक शब्दों में कहा कि समर्थन मूल्य में इस मामूली वृद्धि की घोषणा केवल किसानों के घावों पर नमक छिड़कने और आगामी चुनावों में राजनीतिक लाभ लेने के लिए की गई है। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार की तुलना करते हुए कहा कि पहले जब 2500 रुपये प्रति क्विंटल के अतिरिक्त समर्थन मूल्य बढ़ता था, तब उस बढ़ी हुई राशि को जोड़कर सीधे किसानों को भुगतान किया जाता था, जिससे उन्हें वास्तविक लाभ मिलता था। वर्तमान सरकार की नीतियां किसान विरोधी हैं और बसपा किसानों के हक की लड़ाई सड़क से सदन तक लड़ेगी।