दुर्ग में आधी रात पुलिस का एक्शन: 22 दिनों से डटे अतिथि शिक्षकों का टेंट उखाड़ा, जब्त किया सामान; आंदोलनकारी बोले– ‘दमन से खत्म नहीं होगी हमारी लड़ाई’

 दुर्ग में आधी रात पुलिस का एक्शन: 22 दिनों से डटे अतिथि शिक्षकों का टेंट उखाड़ा, जब्त किया सामान; आंदोलनकारी बोले– ‘दमन से खत्म नहीं होगी हमारी लड़ाई’

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

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दुर्ग में आधी रात पुलिस का एक्शन: 22 दिनों से डटे अतिथि शिक्षकों का टेंट उखाड़ा, जब्त किया सामान; आंदोलनकारी बोले– ‘दमन से खत्म नहीं होगी हमारी लड़ाई’

दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे बस्तर और आदिवासी क्षेत्रों के अतिथि शिक्षकों (गेस्ट टीचर्स) पर पुलिस ने देर रात बड़ी कार्रवाई की है। हिंदी भवन के सामने पिछले 22 दिनों से शांतिपूर्वक चल रहे धरना स्थल पर भारी संख्या में पुलिस बल पहुंचा और शिक्षकों का टेंट उखाड़कर जब्त कर लिया।पुलिस की इस अचानक हुई कार्रवाई के बाद भी अतिथि शिक्षकों के हौसले पस्त नहीं हुए हैं।

संघ के पदाधिकारियों ने दोटूक शब्दों में कहा है कि पुलिसिया कार्रवाई से उनका आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि वे अपनी मांगों के लिए लड़ाई और तेज करेंगे।

दिन में दी थी चेतावनी, रात में चमकाई लाठी

इससे पहले बुधवार दोपहर को दुर्ग पुलिस के आला अधिकारी बड़ी संख्या में जवानों के साथ हिंदी भवन स्थित धरना स्थल पहुंचे थे। प्रदर्शनकारी शिक्षकों का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें शाम तक धरना पूरी तरह समाप्त करने का अल्टीमेटम दिया था। अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि अगर वे खुद से नहीं हटे, तो अगले दिन से उन्हें वहां बैठने नहीं दिया जाएगा। जब शिक्षक अपनी मांगों को लेकर रात में भी डटे रहे, तो पुलिस ने देर रात दलबल के साथ पहुंचकर टेंट और अन्य सामग्रियां हटा दीं।

शिक्षा मंत्री के बंगले का 24 घंटे किया था घेराव

इस कार्रवाई से पहले अतिथि शिक्षकों ने अपनी आवाज बुलंद करते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के दुर्ग स्थित निवास का करीब 24 घंटे तक घेराव किया था। उस दौरान प्रशासन ने मंत्री से सीधे चर्चा कराने का आश्वासन दिया था, जिसके बाद शिक्षक वापस हिंदी भवन के सामने धरने पर लौट आए थे। शिक्षकों को उम्मीद थी कि इस वार्ता से उनकी मांगों पर कोई सकारात्मक फैसला आएगा, लेकिन बातचीत बेनतीजा रहने और आश्वासन टूटने से शिक्षकों में भारी आक्रोश है।

इन प्रमुख मांगों को लेकर आर-पार की जंग

अतिथि शिक्षक संघ का साफ कहना है कि वे वर्षों से बेहद कम संसाधनों में काम कर रहे हैं।

उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:नियमितीकरण:

लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों का विभाग में संविलियन किया जाए।सेवा सुरक्षा: नौकरी से अचानक निकाले जाने के डर को खत्म कर सेवा सुरक्षा की गारंटी दी जाए।समान वेतन: ‘समान कार्य के बदले समान वेतन’ के सिद्धांत के तहत मानदेय में बढ़ोतरी की जाए।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में दी सेवाएं, मिला सिर्फ आश्वासन

आंदोलनकारियों का दर्द है कि उन्होंने बस्तर और अन्य दूर-दराज के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के स्कूलों में अपनी जान जोखिम में डालकर शिक्षा की अलख जगाई है। इसके बावजूद सरकार उनके भविष्य को लेकर कोई स्थायी नीति नहीं बना रही है। हर बार उन्हें सिर्फ कोरा आश्वासन थमा दिया जाता है, जिससे अब हजारों अतिथि शिक्षकों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। इस कार्रवाई के बाद अब प्रदेश भर के शिक्षक संगठनों में आक्रोश भड़कने की आशंका है।