हसदेव में ‘महाविनाश’ पर खामोश क्यों साय सरकार? भूपेश बघेल का तीखा हमला’मोदी के मित्रों’ को 7 लाख पेड़ सौंपने का आरोप; ‘सुशासन तिहार’ के बीच प्रदेश में अराजकता का माहौल
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
******************************
हसदेव में ‘महाविनाश’ पर खामोश क्यों साय सरकार? भूपेश बघेल का तीखा हमला’मोदी के मित्रों’ को 7 लाख पेड़ सौंपने का आरोप; ‘सुशासन तिहार’ के बीच प्रदेश में अराजकता का माहौल
रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हसदेव अरण्य के जंगलों की कटाई को लेकर राज्य की विष्णुदेव साय सरकार और केंद्र की मोदी सरकार पर चौतरफा हमला बोला है। राजधानी रायपुर में पत्रकारों से चर्चा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा जंगलों को साफ करने की हरी झंडी दिए जाने के बाद भी राज्य सरकार ने रहस्यमयी चुप्पी साध रखी है।”मित्रों की स्वार्थपूर्ति में लगी है सरकार”भूपेश बघेल ने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि “आखिर मोदी के कॉर्पोरेट मित्रों को हसदेव के सात लाख पेड़ काटने की अनुमति देने के बावजूद राज्य सरकार खामोश क्यों है?”
उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान राज्य सरकार जनहित को भूलकर सिर्फ अपनी स्वार्थपूर्ति में लगी हुई है। छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक संपदा को उद्योगपतियों के हवाले किया जा रहा है। सरकार दिन-रात इसी गुणा-भाग में व्यस्त है कि राज्य की कौन-कौन सी बहुमूल्य संपदा किसे सौंप दी जाए।
सुशासन तिहार के दावों के बीच ‘प्रशासनिक अराजकता
‘सरकार के ‘सुशासन तिहार’ के दावों पर कड़ा प्रहार करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में इस वक्त सुशासन नहीं, बल्कि प्रशासनिक अराजकता का दौर चल रहा है।बघेल ने सत्तापक्ष के भीतर चल रही खींचतान की ओर इशारा करते हुए कहा, “प्रदेश में जिस तरह मंत्रियों और सांसदों का अधिकारियों के साथ सीधे टकराव की खबरें आ रही हैं, वह बेहद चिंताजनक है।” उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि शीर्ष स्तर पर हो रहा यह अंतर्विरोध साबित करता है कि प्रदेश में कानून और व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह चरमरा चुकी है और चारों तरफ अराजकता के हालात निर्मित हो चुके हैं।
सियासी गलियारों में हड़कंप
पूर्व मुख्यमंत्री के इस आक्रामक तेवर और सीधे आरोपों के बाद प्रदेश की सियासत गरमा गई है। हसदेव अरण्य में पेड़ों की कटाई और सरकार के भीतर चल रहे ‘मंत्री-अफसर’ विवाद को लेकर कांग्रेस अब सड़क से सदन तक सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर रही है।





