भूपेश बघेल के ‘बेंदरा’ वाले बयान पर साहू समाज में उबाल, 10 दिनों में माफी न मांगने पर दी आंदोलन की चेतावनी

 भूपेश बघेल के ‘बेंदरा’ वाले बयान पर साहू समाज में उबाल, 10 दिनों में माफी न मांगने पर दी आंदोलन की चेतावनी

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

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भूपेश बघेल के ‘बेंदरा’ वाले बयान पर साहू समाज में उबाल, 10 दिनों में माफी न मांगने पर दी आंदोलन की चेतावनी

रायपुर: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा उपमुख्यमंत्री अरुण साव के खिलाफ की गई टिप्पणी ने प्रदेश में राजनीतिक और सामाजिक भूचाल ला दिया है। बघेल द्वारा साव की तुलना ‘बंदर’ (बेंदरा) से किए जाने पर साहू समाज ने इसे अपने स्वाभिमान और गौरव पर हमला बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज किया है।

साहू समाज की 10 दिनों की चेतावनी

साहू समाज के प्रदेशाध्यक्ष नीरेन्द्र साहू ने इस बयान पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि भूपेश बघेल 10 दिनों के भीतर सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते हैं, तो समाज पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन करेगा। इसके साथ ही, समाज के प्रतिनिधियों ने विभिन्न जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) को ज्ञापन सौंपकर बघेल के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने का निर्णय लिया है।

विवाद की जड़: “बेंदरा ल राजा बना दिस”

बिलासपुर के लिंगियाडीह क्षेत्र में एक जनसभा को संबोधित करते हुए भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ी में तंज कसा था। उन्होंने उपमुख्यमंत्री के विभागों (नगरीय निकाय, PWD, जल जीवन मिशन) के कामकाज पर सवाल उठाते हुए एक कहानी सुनाई। बघेल ने कहा, “जंगल के जानवरों ने बंदर (बेंदरा) को राजा बना दिया, लेकिन जब शेर हिरण के बच्चे को उठा ले गया, तो बंदर सिर्फ एक पेड़ से दूसरे पेड़ कूदता रहा। पूछने पर बंदर ने कहा कि बच्चा बचे या न बचे, मेरी कोशिश में कमी नहीं होनी चाहिए। यही साव की स्थिति है।”

अरुण साव और विजय शर्मा का पलटवार

इस बयान पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भूपेश बघेल एक वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हैं, उन्हें शब्दों की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। साव ने कहा, “राजनीति में ऐसी भाषा का इस्तेमाल अक्षम्य है।”

वहीं, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी बघेल की निंदा करते हुए कहा कि उन्होंने न केवल भाषा की सीमा लांघी है, बल्कि अपने कार्यकाल में भ्रष्टाचार की भी सभी सीमाएं तोड़ दी थीं।

बचाव में उतरे टीएस सिंहदेव

विवाद बढ़ता देख पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने बघेल का बचाव किया। सिंहदेव ने कहा कि यह टिप्पणी किसी समाज के खिलाफ नहीं, बल्कि एक व्यक्ति विशेष पर की गई थी। उन्होंने इसे “अपनेपन में हुई चूक” बताते हुए मामला शांत करने की कोशिश की।

फिलहाल, इस बयान ने छत्तीसगढ़ की सियासत में व्यक्तिगत छींटाकशी और जातीय स्वाभिमान की बहस को तेज कर दिया है। अब सबकी नजरें भूपेश बघेल के अगले कदम पर टिकी हैं।