दुर्ग जिला प्रशासन की बड़ी कार्रवाई: आदतन गुंडा बदमाश मनीष मांडले एक साल के लिए जिलाबदर, 7 जिलों की सीमाओं में प्रवेश पर लगा बैन

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

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दुर्ग जिला प्रशासन की बड़ी कार्रवाई: आदतन गुंडा बदमाश मनीष मांडले एक साल के लिए जिलाबदर, 7 जिलों की सीमाओं में प्रवेश पर लगा बैन

दुर्ग। क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए दुर्ग कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी श्री अभिजीत सिंह ने सख्त कदम उठाया है। आदतन अपराधी और गुंडा बदमाश मनीष मांडले के आपराधिक आचरण पर कड़ा प्रहार करते हुए छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम 1990 की धारा 5 के तहत उसे एक वर्ष के लिए जिलाबदर करने का आदेश जारी किया है।

यह आदेश 24 सितंबर 2026 से प्रभावी हो गया है। आदेश के तहत अनावेदक मनीष मांडले (पिता: यशवंत मांडले, निवासी: नागदेवता चौक नगपुरा, चौकी नगपुरा, थाना पुलगांव, जिला दुर्ग) को दुर्ग राजस्व जिला समेत आसपास के 6 सीमावर्ती जिलों—रायपुर, बेमेतरा, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, राजनांदगांव, बालोद और धमतरी की सीमाओं से 1 सप्ताह के भीतर बाहर जाने के निर्देश दिए गए हैं। बिना जिला दंडाधिकारी की पूर्व अनुमति के इन जिलों में उसका प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।

सुधरने का नाम नहीं ले रहा था बदमाश, 2018 में भी हुआ था जिलाबदर

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दुर्ग के प्रतिवेदन, थाना पुलगांव से प्राप्त जरामय नकल, गवाहों के बयान और संबंधित दस्तावेजों के अवलोकन के बाद यह कार्रवाई की गई है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, अनावेदक के खिलाफ वर्ष 2013 से अब तक भारतीय दंड संहिता (IPC), भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आबकारी अधिनियम के तहत 8 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसमें वयस्कों व नाबालिगों से मारपीट, महिलाओं से छेड़छाड़ और अवैध शराब की बिक्री जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं।

अपराधिक रिकॉर्ड:

दर्ज अपराध: 07 आईपीसी/बीएनएस अपराध और 01 आबकारी मामला

प्रतिबंधात्मक कार्रवाई: एसडीएम न्यायालय में 13 बार इश्तगाता प्रस्तुत

पूर्व रिकॉर्ड: वर्ष 2018 में भी जिला दंडाधिकारी दुर्ग द्वारा किया जा चुका है जिलाबदर

स्थिति: थाना पुलिस की ‘गुंडा बदमाश’ सूची में नाम दर्ज

आम जनता में था डर का माहौल

लगातार प्रतिबंधात्मक और अभियोजन कार्रवाइयों के बावजूद आरोपी की हरकतों में कोई सुधार नहीं आया था। उसके खौफ के कारण आम नागरिक उसके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराने या अदालत में गवाही देने से कतराते थे। क्षेत्र में भयमुक्त वातावरण निर्मित करने और आपराधिक गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी श्री अभिजीत सिंह ने यह कड़ा रुख अपनाया है।