ईरान में गहराया संकट: महंगाई और दमन के खिलाफ सड़कों पर उतरा जनसैलाब, हिंसा में 42 की मौत,2270 हिरासत में हिरासत में
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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ईरान में गहराया संकट: महंगाई और दमन के खिलाफ सड़कों पर उतरा जनसैलाब, हिंसा में 42 की मौत
नई दिल्ली (तेहरान): ईरान में इस्लामी शासन के खिलाफ जनता का आक्रोश चरम पर पहुँच गया है। बढ़ती महंगाई, चरमराती अर्थव्यवस्था और सुरक्षा बलों की दमनकारी नीतियों के खिलाफ शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब एक व्यापक जनविद्रोह का रूप ले चुका है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के नेतृत्व वाली सरकार ने देश में इंटरनेट सेवाओं और अंतरराष्ट्रीय टेलीफोन कॉल पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है।
रात 8 बजते ही गूंजे आजादी के नारे
युवराज रजा पहलवी द्वारा गुरुवार और शुक्रवार रात 8 बजे विरोध प्रदर्शन के आह्वान का व्यापक असर देखने को मिला। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही घड़ी की सुइयों ने 8 बजाया, राजधानी तेहरान समेत देश के विभिन्न हिस्सों में ‘तानाशाह मुर्दाबाद’ और ‘इस्लामी गणराज्य मुर्दाबाद’ के नारे गूँजने लगे। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट संदेश दिया कि यह उनकी ‘आखिरी लड़ाई’ है और वे पहलवी की वापसी की मांग कर रहे हैं।
भारी हिंसा और गिरफ्तारियां
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, इस आंदोलन को कुचलने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा की गई कार्रवाई में अब तक कम से कम 42 लोगों की जान जा चुकी है। वहीं, देश भर से लगभग 2,270 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। न्यायपालिका और सुरक्षा प्रमुखों ने प्रदर्शनकारियों को कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है, लेकिन इसके बावजूद लोग पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
बाजार बंद, जनजीवन ठप
प्रदर्शनों के समर्थन में ईरान के प्रमुख शहरों और ग्रामीण कस्बों में बाजार पूरी तरह बंद रहे। व्यापारियों और आम नागरिकों ने एकजुटता दिखाते हुए अपनी दुकानें नहीं खोलीं। लोगों का आरोप है कि सैयद अली हुसैनी खामेनेई के नेतृत्व वाली इस्लामी सरकार जनता की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में विफल रही है और केवल दमन के सहारे शासन चला रही है।
ईरान में मौजूदा तनाव को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें भी वहां के घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं। फिलहाल, संचार व्यवस्था ठप होने के कारण देश के भीतर की सटीक जानकारी बाहर आना मुश्किल हो गया है।










