104 वर्षीय बुजुर्ग की 20 एकड़ जमीन पर फर्जी लोन: एक्सिस बैंक के पूर्व अधिकारी समेत 4 को 3-3 साल की कड़ी सजा

 104 वर्षीय बुजुर्ग की 20 एकड़ जमीन पर फर्जी लोन: एक्सिस बैंक के पूर्व अधिकारी समेत 4 को 3-3 साल की कड़ी सजा

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

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104 वर्षीय बुजुर्ग की 20 एकड़ जमीन पर फर्जी लोन: एक्सिस बैंक के पूर्व अधिकारी समेत 4 को 3-3 साल की कड़ी सजा

बिलासपुर। बिलासपुर की एक अदालत ने धोखाधड़ी के एक बेहद गंभीर मामले में मिसाल कायम करते हुए दोषियों को कड़ा सबक सिखाया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अनुप तिग्गा की अदालत ने 104 वर्ष के एक लाचार बुजुर्ग की 20 एकड़ बेशकीमती कृषि भूमि के फर्जी दस्तावेज तैयार कर बैंक से लाखों रुपये का चूना लगाने वाले गिरोह को दोषी करार दिया है।

कोर्ट ने एक्सिस बैंक के तत्कालीन रिलेशनशिप मैनेजर (लोन अधिकारी) सुमन कार्तिक रथ सहित चार आरोपियों को धोखाधड़ी, कूटरचना और आपराधिक साजिश का दोषी पाते हुए तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है।साजिश के तहत हड़पी ऋण पुस्तिका,

बैंक मैनेजर भी शामिल

यह पूरा मामला मुंगेली जिले के ग्राम गोइंद्रा का है। यहाँ के निवासी पीड़ित बुजुर्ग मोहन बंजारे के पास करीब 20 एकड़ कृषि भूमि है। साल 2018 में आरोपियों ने एक सोची-समझी साजिश रची। उन्होंने बुजुर्ग मोहन बंजारे की सहमति और जानकारी के बिना उनकी जमीन की ऋण पुस्तिका (जमीन के कागजात) हासिल कर ली। इसके बाद आरोपियों ने सरकंडा स्थित एक्सिस बैंक की सीपत रोड शाखा के तत्कालीन लोन अधिकारी सुमन कार्तिक रथ के साथ मिलकर जमीन को बैंक में बंधक रख दिया। गिरोह ने फर्जी तरीके से 9 लाख 50 हजार रुपये का केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) लोन पास करा लिया और इस रकम को आपस में बांट लिया।

पोते की सतर्कता से हुआ सनसनीखेज खुलासा

इस बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश तब हुआ जब पीड़ित बुजुर्ग के पोते शिवचरण बंजारे ने अपने मोबाइल पर दादा के नाम की जमीन का ऑनलाइन रिकॉर्ड सर्च किया। भुइयां पोर्टल या ऑनलाइन रिकॉर्ड में जमीन एक्सिस बैंक सरकंडा में बंधक दिखाई दे रही थी। यह देखकर परिवार के होश उड़ गए। जब पूरा परिवार तुरंत बैंक पहुंचा और लोन से जुड़े दस्तावेज निकलवाए, तो सच्चाई देखकर दंग रह गए। लोन फाइल में पीड़ित मोहन बंजारे के नाम पर किसी अन्य अज्ञात व्यक्ति की फोटो लगी हुई थी। इसके तुरंत बाद पीड़ित पक्ष ने सरकंडा थाने में आरोपियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कराई।

नकली आधार कार्ड और अलग उम्र ने खोली पोल

कोर्ट में सुनवाई के दौरान जब दस्तावेजों का बारीकी से मिलान किया गया, तो हैरान करने वाले तथ्य सामने आए:गलत फोटो का इस्तेमाल: बैंक लोन के आवेदन पत्र पर आरोपी परदेशी लोधी (जिसकी सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी है) की फोटो चिपकाई गई थी, जो असली मालिक मोहन बंजारे से पूरी तरह अलग थी।

फर्जी आधार और वोटर आईडी:

असली आधार कार्ड के अनुसार पीड़ित बुजुर्ग मोहन बंजारे का जन्म साल 1934 में हुआ था (उम्र लगभग 104 वर्ष)। वहीं, लोन लेने के लिए लगाए गए फर्जी आधार कार्ड में जन्म का साल 1969 और वोटर आईडी में 1971 दर्ज किया गया था। दोनों के आधार नंबर भी पूरी तरह अलग थे।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी: नग्न आंखों से दिख रहा था फर्जीवाड़ा

सुनवाई के दौरान माननीय अदालत ने बैंक की कार्यप्रणाली और आरोपियों की नीयत पर सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने दस्तावेजों को देखते हुए कहा कि इसे नग्न आंखों से देखने पर भी साफ पता चलता है कि दस्तावेजों की कूटरचना (फोर्जरी) की गई थी। इसके बावजूद बैंक अधिकारी की मिलीभगत से लोन पास कर दिया गया। कोर्ट ने इस मामले के चारों जीवित आरोपियों को सख्त सजा सुनाकर समाज में यह कड़ा संदेश दिया है कि बुजुर्गों और सीधे-साधे किसानों के साथ धोखाधड़ी करने वालों को कतई बख्शा नहीं जाएगा।