नक्सल मुक्त बस्तर की ओर बड़ी जीत: सुकमा में ₹16 लाख के इनामी नक्सलियों का आत्मसमर्पण, भारी मात्रा में हथियार और ₹10 लाख नगद बरामद
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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नक्सल मुक्त बस्तर की ओर बड़ी जीत: सुकमा में ₹16 लाख के इनामी नक्सलियों का आत्मसमर्पण, भारी मात्रा में हथियार और ₹10 लाख नगद बरामद
सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सल विरोधी अभियान को एक और बड़ी सफलता मिली है। सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव और शासन की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर केकेबीएन डिवीजन (ओडिशा) में सक्रिय दो खूंखार नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है। वहीं, उनकी निशानदेही पर पुलिस ने जंगलों में छिपाया गया हथियारों का जखीरा और ₹10 लाख नगद बरामद किए हैं।
दो इनामी कैडरों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में जनिला उर्फ मड़कम हिंडमे (30 वर्ष) और सोनी उर्फ माड़वी कोसी (24 वर्ष) शामिल हैं। ये दोनों माओवादी कंपनी नंबर 08 के सक्रिय सदस्य थे और इन पर ₹8-8 लाख (कुल ₹16 लाख) का इनाम घोषित था। रक्षित आरक्षी केंद्र सुकमा में बस्तर रेंज आईजी, डीआईजी और पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण की उपस्थिति में दोनों ने मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।
जंगल से बरामद हुआ ‘नक्सल डंप’
आत्मसमर्पित नक्सलियों से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर चलाए गए सर्चिंग अभियान में पुलिस ने नक्सलियों द्वारा छिपाकर रखे गए ऑटोमैटिक हथियारों का जखीरा बरामद किया है। बरामद सामग्रियों में शामिल हैं:
नगद: ₹10 लाख रुपए।
हथियार: 1 इंसास LMG राइफल, 2 AK-47 राइफल और 3 .303 राइफल।
कारतूस: AK-47 के 14 राउंड और .303 के 13 राउंड।
संकल्प: “नक्सल मुक्त बस्तर”
पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने बताया कि सुरक्षा बलों के निरंतर अभियान से माओवादी संगठन अब पूरी तरह कमजोर पड़ चुका है और पीछे हटने को मजबूर है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के ‘नक्सलवाद के खात्मे’ के संकल्प की दिशा में जिला पुलिस तेजी से आगे बढ़ रही है। शासन की नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वालों को आर्थिक सहायता, सुरक्षा और कौशल प्रशिक्षण देकर सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित किया जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, सुकमा के दूरस्थ क्षेत्रों में अब विकास कार्य तेजी से पहुँच रहे हैं, जो नक्सलवाद की समाप्ति का स्पष्ट संकेत है।





