महादेव सट्टा एप के बाद अब ‘खेलो यार’: भिलाई से संचालित ₹40 हजार करोड़ का ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क झारखंड में उजागर; 7 गिरफ्तार

 महादेव सट्टा एप के बाद अब ‘खेलो यार’: भिलाई से संचालित ₹40 हजार करोड़ का ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क झारखंड में उजागर; 7 गिरफ्तार

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

***************************

 

महादेव सट्टा एप के बाद अब ‘खेलो यार’: भिलाई से संचालित ₹40 हजार करोड़ का ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क झारखंड में उजागर; 7 गिरफ्तार

झारखंड/भिलाई: प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप नेटवर्क को ध्वस्त किए जाने के बाद, इसी तरह के एक और बड़े ऑनलाइन सट्टेबाजी रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। ‘खेलो यार’ (Khelo Yaar) नामक यह नेटवर्क कथित तौर पर छत्तीसगढ़ के भिलाई से संचालित हो रहा था, जिसके तार दुबई तक जुड़े हुए थे। झारखंड के पलामू जिले के हुसैनाबाद में स्थानीय पुलिस ने छापेमारी कर सात लोगों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस का दावा है कि यह रैकेट करीब ₹40 हजार करोड़ के अवैध कारोबार में शामिल हो सकता है।

भिलाई मुख्य केंद्र, सरगना शेल्वी फरार

जांच में सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क का मुख्य संचालक भिलाई निवासी शेल्वी उर्फ मनीष है, जो फिलहाल फरार बताया जा रहा है। बिहार का औरंगाबाद निवासी राजन कुमार सिंह उसका सहयोगी था। पलामू पुलिस अधीक्षक (एसपी) रीष्मा रमेशन को मिली गुप्त सूचना और हजारीबाग पुलिस से साझा की गई ‘म्युल अकाउंट’ (किराए के बैंक खाते) संबंधी जानकारी के आधार पर यह कार्रवाई की गई।

झारखंड से 7 आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने हुसैनाबाद में किराए के एक मकान से सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो ऑनलाइन बेटिंग संचालन में सक्रिय थे:

राहुल सिंह (भिलाई, छत्तीसगढ़)

सुजीत कुमार विश्वकर्मा (मदनपुर, बिहार)

अजित कुमार विश्वकर्मा (मदनपुर, बिहार)

रोहित कुमार सिंह (मदनपुर, बिहार)

जुबेर अंसारी (बोकारो, झारखंड)

अयाज आलम (रामगढ़, झारखंड)

अक्षय कुमार (रांची, झारखंड)

कार्यप्रणाली: दुबई सर्वर, ‘म्युल’ खाते और क्रिप्टो

पुलिस के अनुसार, ‘खेलो यार’ की कार्यप्रणाली महादेव ऐप से काफी मिलती-जुलती थी।

दुबई कनेक्शन: नेटवर्क का मुख्य सर्वर दुबई में स्थित था।

फ्रेंचाइजी मॉडल: भिलाई से कई फ्रेंचाइजियां (ब्रांच) संचालित की जाती थीं। पलामू स्थित फ्रेंचाइजी नंबर 141 अकेली हर दिन ₹5 से ₹7 लाख का लेनदेन करती थी और इससे 5 से 6 हजार सदस्य जुड़े हुए थे। अन्य फ्रेंचाइजियों का दैनिक लेनदेन ₹50 से ₹60 लाख तक बताया जा रहा है।

लेनदेन का तरीका: अवैध धन के प्रवाह को छिपाने के लिए संचालक 10 से 15 ‘म्युल’ या किराए के बैंक खातों का उपयोग करते थे। ट्रैकिंग से बचने के लिए हर खाता केवल एक महीने तक इस्तेमाल किया जाता था।

भुगतान: दुबई स्थित प्रमोटर प्रत्येक फ्रेंचाइजी को कुल ट्रांजेक्शन पर 30 प्रतिशत तक कमीशन देता था। पैसे को छिपाने के लिए क्रिप्टोकरेंसी का भी इस्तेमाल किया जा रहा था।

पुलिस ने बताया है कि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, पैसों के प्रवाह की दिशा और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन के संबंध में आगे की जांच जारी है।