छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कहा-30 दिनों के भीतर समितियों से करें धान का उठाव

 छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कहा-30 दिनों के भीतर समितियों से करें धान का उठाव

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक बीरेंद्र कुमार चौधरी 

 

सूखत की आशंका और रिकवरी को लेकर परेशान समितियां शासन के समक्ष पेश करेंगी अभ्यावेदन

 

 

 

 

 

रायपुर। समितियों में डंप पड़े धान और सूखत की आशंका को लेकर परेशान सहकारी समितियों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर धान का उठाव शीघ्र करने की गुहार लगाई है। याचिकाकर्ता समितियों का कहना है कि राज्य विपणन संघ के अधिकारी राज्य शासन के निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं। इसका खामियाजा उनको भुगतना पड़ेगा। सूखत आने की स्थिति में रिकवरी की जाएगी और राशि की वसूली के लिए शासन स्तर पर कार्रवाई भी संभव है। हाई कोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर 30 दिनों के भीतर समितियों से धान का उठाव करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता समितियों को सूखत के संबंध में अभ्यावेदन पेश करने और इस पर 30 दिनों के भीतर निराकरण करने का निर्देश दिया है। जरूरी निर्देशों के साथ ही हाई कोर्ट ने याचिका को निराकृत कर दिया है।

प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति धनगांव जिला सारंगढ़ सहित प्रदेश के अलग-अलग जिलों से तीन दर्जन से अधिक समितियों ने अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर कर समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी के बाद समितियों से धान का उठाव न किए जाने की शिकायत करते हुए शीघ्र उठाव की गुहार लगाई है। सभी याचिकाओं की प्रकृति एक ही तरह के होने के कारण हाई कोर्ट ने सभी याचिकाओं की एकसाथ सुनवाई की। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा है कि राज्य शासन द्वारा संबंधित धान उपार्जन केन्द्रों पर किसानों से सीधे धान खरीदी करने का निर्णय लिया गया था। अक्टूबर-नवंबर 2023 के महीनों में राज्य विपणन संघ जिला सहकारी केंद्रीय बैंक लिमिटेड और प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों के बीच त्रिपक्षी समझौता किया गया। धान खरीदी केन्द्रों में अनुबंध के नियम एवं शर्तों का पालन करते हुए राज्य विपणन संघ को 72 घंटे की बाहरी सीमा के भीतर या 28 फरवरी 2024 तक बफर स्टाक उठाना था। धान खरीदी की अंतिम तिथि चार फरवरी 2024 थी। भंडारण, क्रय प्रक्रिया, कंप्यूटरीकरण आदि का कार्य प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों द्वारा किया जाना था। याचिकाकर्ताओं की शिकायत है कि संबंधित धान उपार्जन केंद्रों द्वारा बफर स्टाक तो खरीद लिया गया, लेकिन राज्य विपणन संघ ने राज्य शासन द्वारा तय समयावधि में धान का उठाव नहीं किया गया। धान न उठाने से धान की मात्रा में कमी हो सकती है और याचिकाकर्ताओं को आशंका है कि राज्य शासन के अधिकारी उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई कर सकते हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि संबंधित अधिकारियों को विभिन्न अभ्यावेदन दिए गए लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया।

 

याचिका में यह बातें प्रमुख

 

 

 

याचिकाकर्ता समितियों का कहना है कि राज्य विपणन संघ संबंधित धान खरीदी केंद्रों से धान उठाने के लिए कोई कदम उठाने में विफल रहा। यह भी तर्क दिया गया है कि केंद्रों द्वारा 16-18 प्रतिशत की स्वीकार्य नमी पर धान खरीदा गया था। लेकिन समय के साथ सूखापन के कारण धान के वजन में कुछ कमी हो सकती है और आडिट के समय आपत्ति हो सकती है। याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि धान खरीद केंद्रों के प्रभारियों या उनके प्रबंधकों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

 

राज्य शासन ने दिया जवाब

 

राज्य शासन की ओर से पैरवी करते हुए महाधिवक्ता कार्यालय के विधि अधिकारियों ने कहा कि धान उठाव के संबंध में प्रबंध निदेशकों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। राज्य विपणन संघ और जिला कलेक्टरों को धान उपार्जन केन्द्रों से धान का उठाव यथाशीघ्र करने कहा है। केंद्र सरकार द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार एक फीसद तक धान की नमी स्वीकार्य है। उनका यह भी कहना है कि राज्य सरकार हर साल इस संबंध में परिपत्र जारी करती है और पिछले वर्ष राज्य सरकार द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार अनुमेय कमी तीन प्रतिशत थी। उन्होंने यह भी कहा कि इस वर्ष इस संबंध में कोई विशेष परिपत्र प्रकाशित नहीं किया गया है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सचिव और सभी प्रबंध निदेशकों द्वारा 15 मार्च को निर्देश जारी किए गए हैं। धान उपार्जन केन्द्रों से धान का उठाव राज्य विपणन संघ एवं कलेक्टरों द्वारा किया जायेगा तथा इस संबंध में एक चार्ट तैयार किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि धान उपार्जन केन्द्रों से धान के उठाव हेतु उचित कार्यवाही की जायेगी। सूखे की कमी के संबंध में राज्य सरकार उचित निर्णय लेगी।

 

अनुबंध की शर्तों का विपणन संघ ने नहीं किया पालन

 

जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता संदीप दुबे व जितेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि अनुबंध में तय किए गए नियम व शर्तों के अनुसार राज्य विपणन संघ को निर्धारित अवधि के भीतर धान का उठाव समितियों से करन लेना चाहिए था। मामले की सुनवाई जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की सिंगल बेंच में हुई। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सचिव द्वारा जारी एक पत्र रिकार्ड पर रखा गया है, जिससे पता चलता है कि छग के प्रबंध निदेशक राज्य विपणन संघ और कलेक्टरों को मामले को देखने और धान उपार्जन केंद्रों से धान के उठाव के लिए उचित कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। इस पत्र के साथ एक चार्ट भी संलग्न किया गया है। ऐसा प्रतीत होता है कि इन याचिकाओं को दायर करने के बाद राज्य सरकार ने धान खरीदी केंद्रों से धान उठाने के लिए कदम उठाया है। राज्य विपणन संघ को निर्देश दिए गए हैं कि धान उपार्जन केंद्रों से धान का उठाव यथाशीघ्र करने के लिए अधिकारियों द्वारा उचित कार्रवाई की जाएगी।