साय कैबिनेट की बैठक में बड़ा फैसला, राज्य में नहीं खुलेगी एक भी नई शराब दुकान, अगले बजट पर भी हुई चर्चा

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान, संपादक वीरेंद्र चौधरी

रायपुर : छत्तीसगढ़ में अब नई शराब दुकान नहीं खुलेगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय कैबिनेट की छठवीं बैठक में यह बड़ा फैसला लिया गया है। बुधवार को नवा रायपुर स्थित महानदी मंत्रालय भवन में चली चार घंटे की बैठक में छत्तीसगढ़ आबकारी नीति वित्तीय वर्ष 2024-25 का अनुमोदन किया गया। इसमें यह निर्णय लिया गया कि कोई भी नई मदिरा दुकान नहीं खोली जाएगी

प्रदेश में अभी 660 देसी-विदेशी शराब दुकानें संचालित हैं। बतादें कि राज्य सरकार ने 16 वर्ष पुरानी आबकारी नीति में बदलाव किया है। सरकार के इस निर्णय को शराबबंदी की ओर अग्रसर कदम माना जा रहा है। हालांकि भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में शराबबंदी का कोई वादा नहीं किया है। इसके बाद भी सरकार शराब पर अंकुश लगाने की दिशा में दिख रही है।

बजट सत्र की तैयारियों पर भी चर्चा
षष्ठम् विधानसभा के द्वितीय सत्र यानी बजट सत्र फरवरी-मार्च 2024 के लिए राज्यपाल के अभिभाषण के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। बजट सत्र पांच फरवरी से आरंभ होकर एक मार्च तक चलेगा। इस दौरान कुल 20 बैठकें होंगी। सत्र की शुरुआत राज्यपाल बिस्वभूषण हरिचंदन के भाषण से होगी। कुल 957 सवालों में तारांकित 505 और 452 अतारांकित सवाल लगे हैं। इस दौरान प्रदेश के तृतीय अनुपूरक अनुमान वर्ष 2023-2024 का विधानसभा में उपस्थापन के लिए छत्तीसगढ़ विनियोग विधेयक-2024 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। बजट अनुमान वर्ष 2024-25 का विधानसभा में उपस्थापन के लिए छत्तीसगढ़ विनियोग विधेयक-2024 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।

न्यायाधीशों के पदनाम में यह होगा बदलाव
कैबिनेट की बैठक में छत्तीसगढ़ सिविल न्यायालय (संशोधन) विधेयक-2024 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया है। इस संशोधन में ‘जिला न्यायाधीश‘ को ‘प्रधान जिला न्यायाधीश‘ और ‘अपर जिला न्यायाधीश‘ को ‘जिला न्यायाधीश‘ करने का प्रविधान रखा गया है। इसी तरह ‘व्यवहार न्यायाधीश प्रथम वर्ग‘ को ‘व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी‘ और ‘व्यवहार न्यायाधीश द्वितीय वर्ग‘ को ‘व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी‘ और ‘जिला न्यायालय‘ को ‘प्रधान जिला न्यायालय‘ से प्रतिस्थापित करने का प्रविधान रखा गया है। उच्च न्यायालय बिलासपुर में ज्वाइंट रजिस्ट्रार (एम) के पांच पद आकस्मिकता निधि से सृजित करने का निर्णय लिया गया है।

शराबबंदी के मुद्दे से सत्ता में आई थी भूपेश सरकार
प्रदेश की चुनावी सियासत में शराबबंदी बड़ा मुद्दा रहा है। कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव 2018 में चुनावी घोषणा पत्र में भी शराबबंदी का वादा किया था। यह वादा करके भूपेश सरकार सत्ता में आई थी मगर शराबबंदी नहीं हुई। वहीं हर साल शराब से राजस्व का आकार बढ़ता रहा। भूपेश सरकार में पिछले वर्ष 2023 में राज्य में 15 हजार करोड़ रुपये की शराब बेची गई थी, जिससे सरकार को 6,800 करोड़ रुपये का टैक्स मिला था। यह निर्धारित लक्ष्य से 300 करोड़ रुपये अधिक था , जबकि आबकारी विभाग ने वर्ष के प्रारंभ में 5000 करोड़ राजस्व का लक्ष्य निर्धारित किया था।