आत्मानंद स्कूलों में फीस लागू करना गरीब विरोधी फैसला, पार्षद विजय साव ने राज्य सरकार को घेरा
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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आत्मानंद स्कूलों में फीस लागू करना गरीब विरोधी फैसला, पार्षद विजय साव ने राज्य सरकार को घेरा
महासमुंद। स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों में कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों पर 1500 रुपये वार्षिक शुल्क लगाए जाने के राज्य सरकार के निर्णय का महासमुंद पार्षद विजय साव ने कड़ा विरोध किया है। उन्होंने इस फैसले को पूरी तरह ‘गरीब विरोधी’ और ‘जनविरोधी’ करार देते हुए इसकी घोर निंदा की है।
योजना के मूल स्वरूप से खिलवाड़ का आरोप
पार्षद विजय साव ने कहा कि वर्ष 2019 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने प्रदेश के गरीब, वंचित और मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों को उच्चस्तरीय अंग्रेजी माध्यम शिक्षा देने के उद्देश्य से यह योजना शुरू की थी। आज प्रदेशभर में संचालित लगभग 751 स्कूलों में विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा, गणवेश और पुस्तकें मिल रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार द्वारा शुल्क लागू करना इस सफल मॉडल को कमजोर करने का षड्यंत्र है।
अभिभावकों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ
साव ने कहा कि आत्मानंद स्कूलों में प्रवेश के लिए हमेशा मारामारी रहती है और लॉटरी निकालनी पड़ती है, जो इसकी लोकप्रियता का प्रमाण है। लेकिन अब 1500 रुपये फीस का बोझ उन हजारों परिवारों के लिए भारी पड़ेगा जिनके लिए दो वक्त की रोटी जुटाना भी संघर्ष है। उन्होंने आशंका जताई कि इस फैसले से मजबूर होकर कई अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल से निकाल सकते हैं, जिससे योजना का मूल उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा।
निःशुल्क शिक्षा पर कुठाराघात
विजय साव ने जोर देकर कहा कि इन विद्यालयों की सबसे बड़ी विशेषता बिना किसी भेदभाव के सभी वर्गों को मिलने वाली निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा रही है। सरकार का यह कदम शिक्षा के लोकतंत्रीकरण पर सीधा प्रहार है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस जनविरोधी निर्णय को तत्काल वापस लिया जाए ताकि गरीब बच्चों का भविष्य अंधकारमय होने से बच सके।





