छत्तीसगढ़ में ‘कमिश्नरेट’ विस्तार: रायपुर के बाद अब बिलासपुर और दुर्ग-भिलाई में भी पुलिस के पास होंगी मजिस्ट्रियल शक्तियाँ
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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छत्तीसगढ़ में ‘कमिश्नरेट’ विस्तार: रायपुर के बाद अब बिलासपुर और दुर्ग-भिलाई में भी पुलिस के पास होंगी मजिस्ट्रियल शक्तियाँ
बिलासपुर दर्ग:छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य की कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। राजधानी रायपुर की तर्ज पर अब राज्य के दो और बड़े केंद्रों—बिलासपुर और दुर्ग-भिलाई—में ‘पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली’ लागू करने की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है। गृहमंत्री के इस निर्णय से इन शहरों में पुलिसिंग का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा।
क्या है कमिश्नरेट प्रणाली और क्यों है खास?
पारंपरिक पुलिसिंग व्यवस्था में धारा 144 लागू करने, लाठीचार्ज के आदेश देने या विभिन्न लाइसेंस जारी करने जैसे कार्यकारी अधिकार जिला दंडाधिकारी (कलेक्टर) के पास होते हैं। लेकिन कमिश्नरेट प्रणाली लागू होते ही ये तमाम मजिस्ट्रियल शक्तियाँ (दंड प्रक्रिया संहिता के तहत) सीधे पुलिस आयुक्त (Police Commissioner) के पास आ जाती हैं।
इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि पुलिस को आपात स्थितियों, जैसे दंगे या भीड़ नियंत्रण के समय, फैसले लेने के लिए फाइल जिला प्रशासन के पास नहीं भेजनी पड़ती। इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया त्वरित और स्वतंत्र हो जाती है।
बिलासपुर और दुर्ग-भिलाई ही क्यों?
बिलासपुर: राज्य की न्यायधानी होने के साथ-साथ यह प्रशासनिक रूप से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण शहर है।
दुर्ग-भिलाई: औद्योगिक हब होने के कारण यहाँ की आबादी और शहरीकरण की रफ्तार बहुत तेज है।
सरकार का मानना है कि इन तेजी से विकसित हो रहे शहरों में अपराध नियंत्रण, ट्रैफिक मैनेजमेंट और संगठित अपराधों पर लगाम कसने के लिए पुलिस को अतिरिक्त शक्तियों की आवश्यकता है।
जनता को क्या होगा लाभ?
गृहमंत्री के अनुसार, इस नई प्रणाली से आम नागरिकों की शिकायतों का समाधान तेजी से होगा। पुलिस अब कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अधिक सक्षम होगी, जिससे शहरों में सुरक्षा का माहौल और मजबूत होगा। प्रशासनिक समन्वय बेहतर होने से अपराधियों में खौफ और आम जनता में पुलिस के प्रति विश्वास बढ़ेगा।





