छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की समय-सीमा बढ़ी: अब 4 और 5 फरवरी को भी होगी खरीदी

 छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की समय-सीमा बढ़ी: अब 4 और 5 फरवरी को भी होगी खरीदी

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

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छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की समय-सीमा बढ़ी: अब 4 और 5 फरवरी को भी होगी खरीदी

रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार ने प्रदेश के किसानों के हित में एक बड़ा निर्णय लेते हुए धान खरीदी की समय-अवधि को दो दिन के लिए बढ़ा दिया है। अब राज्य के उपार्जन केंद्रों में 4 और 5 फरवरी को भी धान की खरीदी की जाएगी। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को इस निर्णय की घोषणा करते हुए कहा कि समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि कुछ पंजीकृत किसानों के टोकन नहीं कट पाए थे और कुछ तकनीकी कारणों से धान नहीं बेच सके थे।

क्यों बढ़ाई गई तारीख?

हाल ही में हुई समीक्षा में यह पाया गया कि टोकन कटने के बावजूद बड़ी संख्या में किसान अपना धान बेचने से वंचित रह गए थे। समाचार माध्यमों और कृषि विभाग की पड़ताल में यह बात सामने आई कि लगभग ढाई लाख किसानों का धान अब भी केंद्रों तक नहीं पहुँच पाया है। कृषि मंत्री रामविचार नेताम द्वारा जिलों से रिपोर्ट मांगे जाने के बाद मुख्यमंत्री ने किसानों की सुविधा हेतु यह दो दिवसीय विस्तार दिया है।

कौन से किसान होंगे पात्र?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल वही किसान धान बेच पाएंगे जो निम्नलिखित श्रेणियों में आते हैं:

लंबित सत्यापन वाले किसान: जिन्होंने 10 जनवरी 2026 के बाद टोकन हेतु आवेदन किया था, लेकिन भौतिक सत्यापन अधूरा था।

स्टॉक वाले किसान: 10 जनवरी के बाद आवेदन करने वाले वे किसान, जिनके पास सत्यापन के दौरान वास्तव में धान का स्टॉक पाया गया।

छूटे हुए टोकन धारी: जिन्हें 28, 29 या 30 जनवरी के लिए टोकन जारी हुआ था, लेकिन वे किसी कारणवश धान नहीं बेच पाए थे।

अब तक की खरीदी के मुख्य आँकड़े

15 नवंबर 2025 से शुरू हुए इस महाभियान ने अब तक के कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं:

विवरण संख्या/मात्रा

कुल खरीदी (31 जनवरी तक) लगभग 140 लाख टन

लाभान्वित किसान 25 लाख 11 हजार से अधिक

कुल भुगतान 33,149 करोड़ रुपये

कुल पंजीकृत किसान 27 लाख 43 हजार 145

कुल उपार्जन केंद्र 2,740

“हमने धान खरीदी की समीक्षा की है। कुछ किसान जिनका टोकन कट गया था और धान नहीं बेच पाए थे, उनके हितों को ध्यान में रखते हुए हमने दो दिन और धान खरीदने का निर्णय लिया है।”

— विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री