छत्तीसगढ़ सेक्स सीडी कांड: पूर्व CM भूपेश बघेल की बढ़ीं मुश्किलें, सेशन कोर्ट के फैसले के बाद अब चलेगा ट्रायल
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
******************************
छत्तीसगढ़ सेक्स सीडी कांड: पूर्व CM भूपेश बघेल की बढ़ीं मुश्किलें, सेशन कोर्ट के फैसले के बाद अब चलेगा ट्रायल
रायपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित सेक्स सीडी कांड में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और अन्य आरोपियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। रायपुर सेशन कोर्ट ने CBI की लोअर कोर्ट के मार्च 2025 के उस फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें भूपेश बघेल को सभी धाराओं से मुक्त (डिस्चार्ज) कर दिया गया था। सेशन कोर्ट ने CBI की रिव्यू पिटीशन को स्वीकार करते हुए आदेश दिया है कि अब भूपेश बघेल समेत सभी आरोपियों के खिलाफ ट्रायल शुरू होगा।
सेशन कोर्ट का सख्त निर्देश
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं, जिसके आधार पर ट्रायल चलाया जाना आवश्यक है। कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को नियमित रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश भी दिया है। इससे पहले, CBI की विशेष अदालत ने बघेल को आरोपमुक्त कर दिया था, जिसे जांच एजेंसी ने सेशन कोर्ट में चुनौती दी थी।
इन आरोपियों पर भी चलेगा केस
इस मामले में भूपेश बघेल के अलावा उनके तत्कालीन मीडिया सलाहकार विनोद वर्मा, कारोबारी कैलाश मुरारका, विजय भाटिया और विजय पांडेय भी आरोपी हैं। कैलाश मुरारका और विनोद वर्मा ने खुद को केस से अलग करने (आरोपमुक्त करने) के लिए आवेदन दिया था, जिसे सेशन कोर्ट ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इन सभी को मुकदमे का सामना करना होगा।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद अक्टूबर 2017 में तब शुरू हुआ था जब छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक कथित अश्लील सीडी सामने आई थी।
FIR और गिरफ्तारी: भाजपा नेता प्रकाश बजाज ने 26 अक्टूबर 2017 को पंडरी थाने में ब्लैकमेलिंग और पैसे मांगने की शिकायत दर्ज कराई थी।
CBI जांच: मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच CBI को सौंपी गई। जांच में दिल्ली की एक दुकान का लिंक सामने आया, जहाँ यह सीडी बनाने का दावा किया गया था।
खुदकुशी: केस की जांच के दौरान एक आरोपी रिंकू खनूजा ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी।
राजनीतिक प्रभाव
सेशन कोर्ट के इस ताजा फैसले ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। चूंकि अब ट्रायल शुरू होने वाला है, ऐसे में यह मामला न केवल कानूनी रूप से बल्कि राजनीतिक और चुनावी रणनीतियों के लिहाज से भी कांग्रेस और पूर्व मुख्यमंत्री के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।












