छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक इतिहास में नया अध्याय: डॉ. संजीव शुक्ला बने प्रदेश के पहले ‘कमिश्नर ऑफ पुलिस’
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक इतिहास में नया अध्याय: डॉ. संजीव शुक्ला बने प्रदेश के पहले ‘कमिश्नर ऑफ पुलिस’
रायपुर/दुर्ग: छत्तीसगढ़ राज्य के प्रशासनिक और पुलिस ढांचे में हाल ही में एक ऐतिहासिक बदलाव देखा गया है। राज्य सरकार द्वारा पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू किए जाने के बाद, वरिष्ठ भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी डॉ. संजीव शुक्ला को छत्तीसगढ़ का पहला पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया गया है।
जन्म और प्रारंभिक जीवन (प्रष्ठभूमि)
डॉ. संजीव शुक्ला मूल रूप से मध्य प्रदेश (जबलपुर) के रहने वाले हैं। उनका जन्म एक शिक्षित परिवार में हुआ। उन्होंने चिकित्सा (MBBS) की पढ़ाई की थी, लेकिन जनसेवा के प्रति उनके रुझान ने उन्हें सिविल सेवा की ओर प्रेरित किया। वह 1992 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी थे, जो बाद में छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद छत्तीसगढ़ कैडर में शामिल हो गए।
शिक्षा और योग्यता
डिग्री: एमबीबीएस (डॉक्टर)।
कैडर: 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी।
विशेषता: उन्हें अपराध नियंत्रण और प्रशासनिक सुधारों के लिए जाना जाता है।
महत्वपूर्ण पोस्टिंग और करियर का सफर
डॉ. संजीव शुक्ला का करियर बेहद प्रभावशाली रहा है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों और विभागों में अपनी सेवाएं दी हैं:
जिला पुलिस अधीक्षक (SP): उन्होंने रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग जैसे महत्वपूर्ण जिलों में एसपी के रूप में अपनी कमान संभाली।
डीआईजी और आईजी: वे बस्तर जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी पदस्थ रहे, जहाँ उन्होंने कानून-व्यवस्था बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई।
इंटेलिजेंस (खुफिया विभाग): डॉ. शुक्ला ने राज्य के इंटेलिजेंस विंग में भी लंबे समय तक काम किया, जो उनकी रणनीतिक सूझबूझ को दर्शाता है।
परिवहन आयुक्त: पुलिसिंग के अलावा, उन्होंने छत्तीसगढ़ के परिवहन आयुक्त (Transport Commissioner) के रूप में भी कार्य किया, जहाँ उन्होंने विभाग के डिजिटलीकरण पर जोर दिया।
एडीजी (अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक): कमिश्नर बनने से पहले वे एडीजी स्तर के पदों पर कार्यरत थे।
पहले पुलिस कमिश्नर के रूप में भूमिका
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए रायपुर और दुर्ग-भिलाई जैसे क्षेत्रों में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू की है। डॉ. संजय शुक्ला को इस नई व्यवस्था का नेतृत्व करने के लिए उनकी वरिष्ठता और बेदाग छवि के कारण चुना गया।
प्रमुख उपलब्धियां:
नक्सल विरोधी अभियानों में समन्वय।
ट्रैफिक और शहरी सुरक्षा के लिए तकनीकी नवाचार।
प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता लाना।
डॉ. संजीव शुक्ला की नियुक्ति से राज्य में पुलिसिंग की कार्यक्षमता और अपराधियों पर अंकुश लगाने की गति में तेजी आने की उम्मीद है। उनके अनुभव और चिकित्सा पृष्ठभूमि के कारण वे ‘सेंसिटिव पुलिसिंग’ (संवेदनशील पुलिस व्यवस्था) के पैरोकार माने जाते हैं।













