बिलासपुर हाईकोर्ट का अहम फैसला: ‘आई लव यू’ कहकर लड़की का हाथ खींचना महिला की मर्यादा भंग करना, आरोपी को जेल
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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बिलासपुर हाईकोर्ट का अहम फैसला: ‘आई लव यू’ कहकर लड़की का हाथ खींचना महिला की मर्यादा भंग करना, आरोपी को जेल
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर हाईकोर्ट ने महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी लड़की को ‘आई लव यू’ बोलकर उसका हाथ पकड़ना और उसे अपनी ओर खींचना महिला की मर्यादा भंग करने के समान है और यह एक दंडनीय अपराध है।
क्या है पूरा मामला?
यह घटना 28 नवंबर 2019 की है, जब रायगढ़ जिले के भूपदेवपुर क्षेत्र की एक छात्रा स्कूल से घर लौट रही थी। रास्ते में 19 वर्षीय आरोपी रोहित चौहान ने उसे रोका, उसका हाथ पकड़ा और ‘आई लव यू’ कहते हुए उसे अपनी ओर खींचने की कोशिश की। विरोध करने पर आरोपी ने गाली-गलौज भी की। पीड़िता ने घर जाकर परिजनों को आपबीती सुनाई, जिसके बाद पुलिस में मामला दर्ज कराया गया।
निचली अदालत ने सुनाई थी 3 साल की सजा
रायगढ़ की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 20 मई 2022 को इस मामले में फैसला सुनाते हुए आरोपी को आईपीसी की धारा 354 और पॉक्सो एक्ट की धारा 8 के तहत दोषी पाया था। कोर्ट ने आरोपी को 3-3 साल की कैद और जुर्माने की सजा सुनाई थी, जिसे आरोपी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट का फैसला: पॉक्सो हटा, धारा 354 बरकरार
जस्टिस एन.के. चंद्रवंशी की सिंगल बेंच में हुई सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने दलील दी कि पीड़िता की उम्र को लेकर विरोधाभास है। स्कूल रिकॉर्ड में जन्मतिथि 2005 दर्ज है, जबकि पिता ने गवाही में 2003 बताया। कोई पुख्ता प्रमाण (जन्म प्रमाणपत्र या आधार) न होने के कारण कोर्ट ने आरोपी को पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के आरोपों से बरी कर दिया।
हालांकि, कोर्ट ने आईपीसी की धारा 354 (महिला की मर्यादा भंग करने के इरादे से हमला) के तहत दोष सिद्ध माना। कोर्ट ने कहा:
“मर्यादा का अर्थ महिला की गरिमा और उसकी ‘सेक्सुअल डिसेंसी’ से है। ऐसी हरकतें महिलाओं की अस्मिता को ठेस पहुँचाती हैं और इन्हें सामान्य मानकर छोड़ा नहीं जा सकता।”
सजा कम की गई, सरेंडर करने का आदेश
हाईकोर्ट ने आरोपी की सजा को 3 साल से घटाकर 1 साल कर दिया है। चूंकि आरोपी वर्तमान में जमानत पर है, इसलिए कोर्ट ने उसे शेष सजा काटने के लिए तत्काल सरेंडर करने के निर्देश दिए हैं।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला उन मामलों में एक मिसाल बनेगा जहाँ छेड़छाड़ को मामूली बताकर बचाव करने की कोशिश की जाती है। अधिक कानूनी जानकारी के लिए आप छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।









