गुरुजी अब पढ़ाएंगे या आवारा कुत्ते भगाएंगे? छत्तीसगढ़ में शिक्षकों को ‘डॉग वॉचर’ बनाने पर मचा बवाल
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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गुरुजी अब पढ़ाएंगे या आवारा कुत्ते भगाएंगे? छत्तीसगढ़ में शिक्षकों को ‘डॉग वॉचर’ बनाने पर मचा बवाल
रायपुर, छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को अब एक अजीबोगरीब जिम्मेदारी सौंपी गई है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने एक आदेश जारी कर सभी स्कूलों के प्राचार्यों और शिक्षकों को अपने परिसरों के आस-पास घूम रहे आवारा कुत्तों की निगरानी करने का निर्देश दिया है। इस फरमान ने शिक्षकों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है और राजनीतिक गलियारों में भी हंगामा मच गया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला
पृष्ठभूमि: DPI ने सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया आदेश का हवाला देते हुए यह निर्देश जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और अन्य सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश दिया था।
लक्ष्य: विभाग का कहना है कि यह कदम स्कूल परिसर में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन्हें मध्याह्न भोजन के दौरान कुत्तों से बचाने के लिए उठाया गया है।
शिक्षकों में आक्रोश और विरोध
अनावश्यक बोझ: शिक्षकों का कहना है कि पहले से ही पढ़ाई, मिड-डे मील और बीएलओ ड्यूटी जैसे कई कामों का बोझ है। अब यह एक और गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारी उन पर थोप दी गई है।
समय की बर्बादी: टीचर्स एसोसिएशन का तर्क है कि अगर शिक्षक आवारा कुत्तों पर नजर रखने और स्थानीय निकायों को इसकी सूचना देने में समय बर्बाद करेंगे, तो वे बच्चों को ठीक से नहीं पढ़ा पाएंगे।
अव्यावहारिक आदेश: शाला शिक्षक संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने इस आदेश को अव्यावहारिक करार देते हुए इसे तत्काल निरस्त करने की मांग की है।
विपक्ष और राजनेताओं की प्रतिक्रिया
टीएस सिंहदेव की आपत्ति: कांग्रेस नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने भी इस आदेश पर आपत्ति जताते हुए कहा कि शिक्षकों की जवाबदेही सिर्फ बच्चों को पढ़ाने की होनी चाहिए।
विपक्ष का हमला: विपक्ष ने इस मामले पर सरकार को आड़े हाथों लिया है। उनका कहना है कि सरकार शिक्षकों को पढ़ाने के बजाय अन्य कामों में झोंक रही है, जिससे शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
सरकार की सफाई
उद्देश्य: सरकार ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि इस आदेश का उद्देश्य सिर्फ बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
गणना नहीं: उनका कहना है कि शिक्षकों को कुत्तों की गणना नहीं करनी है, बल्कि सिर्फ स्कूल के आसपास आवारा जानवरों की सूचना देनी है, ताकि स्थानीय निकाय कार्रवाई कर सकें।
यह देखना बाकी है कि शिक्षकों का यह विरोध कितना असरदार होता है और सरकार इस अजीबोगरीब आदेश पर पुनर्विचार करती है या नहीं। फिलहाल तो ‘गुरुजी’ की नई ‘डॉग वॉचर’ वाली ड्यूटी पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है।







