छत्तीसगढ़ में धान खरीदी पर घमासान: डिप्टी CM अरुण साव का कांग्रेस पर तीखा तंज, भूपेश बघेल को कहा ‘पनौती’
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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छत्तीसगढ़ में धान खरीदी पर घमासान: डिप्टी CM अरुण साव का कांग्रेस पर तीखा तंज, भूपेश बघेल को कहा ‘पनौती’
रायपुर, 16 नवंबर 2025: छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए धान खरीदी शुरू होने के साथ ही इस मुद्दे पर राजनीतिक घमासान तेज़ हो गया है। कांग्रेस द्वारा धान खरीदी की निगरानी के लिए समिति बनाए जाने पर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने तीखा तंज कसा है। इसके अलावा, बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों को लेकर उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को ‘पनौती’ तक कह डाला।
कांग्रेस की निगरानी समिति पर तंज: “धोखा देने वाले क्या करेंगे निगरानी”
डिप्टी सीएम अरुण साव ने कांग्रेस द्वारा धान खरीदी प्रक्रिया पर निगरानी रखने के लिए गठित समिति की आलोचना की है। उन्होंने कहा, “जो लोग किसानों को धोखा देते आए हैं, वे क्या निगरानी करेंगे?”। साव ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने किसानों को बोनस देने का वादा किया था, लेकिन पांच साल तक उसे पूरा नहीं किया और किस्तों में भुगतान किया, जिसमें कटौती भी की गई। उन्होंने जोर देकर कहा कि मौजूदा भाजपा सरकार किसान हितैषी है और सभी वादों को पूरा कर रही है, तथा धान खरीदी निर्धारित तिथि (15 नवंबर) से सुचारू रूप से शुरू हो गई है।
बिहार हार पर भूपेश बघेल को कहा ‘पनौती’
धान खरीदी के अलावा, बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की हार को लेकर भी अरुण साव ने भूपेश बघेल पर निशाना साधा। दरअसल, चुनाव नतीजों के बाद भूपेश बघेल ने हार का ठीकरा चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर फोड़ा था। इस पर पलटवार करते हुए साव ने पूर्व सीएम बघेल को ‘पनौती’ कहा।
साव ने कहा कि कांग्रेस के नेता हमेशा से देश के संवैधानिक संस्थानों और सेना पर सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जहां-जहां भूपेश बघेल चुनाव प्रचार के लिए जाते हैं, वहां कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ता है, इसलिए वह पार्टी के लिए ‘पनौती’ साबित हो रहे हैं।
धान खरीदी की मौजूदा स्थिति
छत्तीसगढ़ सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए 15 नवंबर से 31 जनवरी, 2026 तक समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू कर दी है। किसानों को ₹3,100 प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है, जिसमें केंद्र सरकार के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और राज्य की आदान सहायता राशि शामिल है। सरकार का लक्ष्य इस सीजन में 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदना है।








