छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में संभाग के सेवा सहकारी समितियों के प्रबंधक, कर्मचारी एवं कम्प्यूटर ऑपरेटर्स चार सूत्रीय मांगों को लेकर की हड़ताल, किसानों को धान बेचने में हो सकती है दिक्कत,

 छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में संभाग के सेवा सहकारी समितियों के प्रबंधक, कर्मचारी एवं कम्प्यूटर ऑपरेटर्स चार सूत्रीय मांगों को लेकर की हड़ताल, किसानों को धान बेचने में हो सकती है दिक्कत,

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान की रिपोर्ट कैमरामैन सौदागर नियाल

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छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में संभाग के सेवा सहकारी समितियों के प्रबंधक, कर्मचारी एवं कम्प्यूटर ऑपरेटर्स चार सूत्रीय मांगों को लेकर  ने की हड़ताल,

 

 

दुर्ग: दुर्ग जिले में सहकारी समिति के कर्मचारी एवं कंप्यूटर ऑपरेटर 4 सूत्रीय मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं. छत्तीसगढ़ में सरकार 15 नवंबर से समर्थन मूल्य प्रधान खरीदी प्रारंभ करने का ऐलान कर चुकी है. वहीं जिला सहकारी समिति कर्मचारी संघ एवं समर्थन मूल्य धान खरीदी कंप्यूटर ऑपरेटर संघ के संयुक्त तत्वाधान में समिति के सभी कर्मचारी एवं कंप्यूटर ऑपरेटर चार सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं.

सरकार के खिलाफ नारेबाजी :इस कड़ी में  दुर्ग संभाग के सैकड़ों कर्मचारियों ने धरना प्रदर्शन का आयोजन किया. धरने के दौरान समिति के कर्मचारी एवं कंप्यूटर ऑपरेटर ने जमकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की. सहकारी समिति कर्मचारियों की चार मांगें हैं.

उचित मूल्य दुकानदारों और संविदा ऑपरेटरों को छह महीने के बजाए 12 महीने का वेतन दिया जाए.संविदा ऑपरेटरों को नियमित किया जाए.सहायक कर्मचारियों के लिए विभागीय भर्ती में सहायक कर्मचारियों को 50% कोटा, उम्र एवं योग्यता में छूट दी जाए.

 

सहकारी समितियों के प्रबंधक, कर्मचारी एवं कम्प्यूटर ऑपरेटर्स  अन्य मांगें:

 

धान खरीदी में निश्चित समय पर धान का उठाव न होने पर सूखत (शॉर्टेज) की राशि मान्यता दी जाए. 2023-24 और 2024-25 धान खरीदी से संबंधित सूखत की राशि समितियों को दी जाए.समिति प्रबंधकों और कर्मचारियों के लिए सेवा नियम 2018 में संशोधन करके उन्हें उचित वेतनमान, पेंशन, भविष्य निधि का लाभ मिले.

 

 

आपको जानकारी हो कि राज्य सरकार ने 15 नवंबर से धान खरीदी की घोषणा कर दी है. लेकिन अभी कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से कोई तैयारी भी नहीं हुई है. अब देखना होगा कि बीजेपी सरकार कर्मचारियों की मांग को कब पूरी करती है और छत्तीसगढ़ का किसान अपनी धान कब बेच पाएगा.