मणिपुर आतंकी हमले में शहीद रंजीत कुमार कश्यप का बस्तर के बालेंगा गांव में आज अंतिम-संस्कार,पूरे सैन्य सम्मान के साथ दी जाएगी विदाई;

 मणिपुर आतंकी हमले में शहीद रंजीत कुमार कश्यप का बस्तर के बालेंगा गांव में आज अंतिम-संस्कार,पूरे सैन्य सम्मान के साथ दी जाएगी विदाई;

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार चौधरी

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मणिपुर आतंकी हमले में शहीद रंजीत कुमार कश्यप का बस्तर के बालेंगा गांव में आज अंतिम-संस्कार,पूरे सैन्य सम्मान के साथ दी जाएगी विदाई;

रायपुर।मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में हुए आतंकी हमले में बस्तर का लाल शहीद हो गया। बालेंगा गांव में आज पूरे सम्मान के साथ शहीद रंजीत कुमार कश्यप का अंतिम संस्कार किया जाएगा। इससे पहले रविवार को शहीद का पार्थिव शरीर प्लेन से रायपुर लाया गया था। एयरपोर्ट पर जवानों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। साथ ही सलामी शस्त्र अर्पित किया।

 

रायपुर एयरपोर्ट पर श्रद्धांजलि देने CM विष्णुदेव साय आने वाले थे, हालांकि वह नहीं पहुंच सके। जवानों के श्रद्धांजलि देने के बाद शहीद रंजीत के पार्थिव शरीर को एम्स भेजा गया। वहां से बस्तर के बालेंगा गांव ले जाया गया।

 

 

अब जानिए शहीद रंजीत कश्यप के बारे में ?

 

शहीद रंजीत कश्यप बस्तर जिले के बालेंगा गांव के रहने वाले थे। रंजीत 2016 में असम राइफल्स में भर्ती हुए। ग्रामीणों और दोस्तों के मुताबिक रंजीत पिछले महीने ही छुट्टी पर गांव आए थे। करीब एक महीने तक अपने परिजनों के साथ रहे। इसके बाद 14 सितंबर को वह ड्यूटी पर लौटे थे।

गांव के दोस्तों ने बताया कि रंजीत ने अपने साथियों से कहा था कि सेवा के तीन साल बाकी हैं। इसके बाद रिटायर होकर गांव लौट जाऊंगा और बुजुर्ग माता-पिता का सहारा बनूंगा, लेकिन आज वह हमारे बीच नहीं है। हमारा अच्छा दोस्त था।

 

वहीं परिजन बताते हैं कि रंजीत का सपना देश की रक्षा करने का था। वह अपने परिवार का इकलौता बेटा था। अपने पीछे माता-पिता, पत्नी और तीन बेटियों को छोड़ गए हैं। रंजीत की तीन बेटियां हैं। एक बहन की शादी भी बीएसएफ जवान से हुई है। शहादत की खबर मिलते ही गांव में शोक है।

शुक्रवार को हुआ था हमला

 

जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार शाम करीब 6 बजे बिष्णुपुर जिले के नांबोल सबल लीकाई इलाके में आतंकियों ने असम राइफल्स के काफिले पर घात लगाकर हमला किया। अचानक हुई गोलीबारी में एक वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। इस हमले में एक ऑफिसर और जवान रंजीत कुमार कश्यप शहीद हो गए।

 

इनके अलावा तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनमें से एक की हालत नाजुक बताई जा रही है। वहीं, रंजीत कश्यप बस्तर के बालेंगा इलाके के रहने वाले थे। असम में अपनी सेवा दे रहे थे।

 

 

4 पॉइंट्स में समझिए मणिपुर हिंसा की वजह…

 

मणिपुर की आबादी करीब 38 लाख है। यहां तीन प्रमुख समुदाय हैं- मैतेई, नगा और कुकी। मैतई ज्यादातर हिंदू हैं। नगा-कुकी ईसाई धर्म को मानते हैं। ST वर्ग में आते हैं। इनकी आबादी करीब 50% है। राज्य के करीब 10% इलाके में फैली इंफाल घाटी मैतेई समुदाय बहुल ही है। नगा-कुकी की आबादी करीब 34 प्रतिशत है। ये लोग राज्य के करीब 90% इलाके में रहते हैं।

 

कैसे शुरू हुआ विवाद: मैतेई समुदाय की मांग है कि उन्हें भी जनजाति का दर्जा दिया जाए। समुदाय ने इसके लिए मणिपुर हाई कोर्ट में याचिका लगाई। समुदाय की दलील थी कि 1949 में मणिपुर का भारत में विलय हुआ था। उससे पहले उन्हें जनजाति का ही दर्जा मिला हुआ था। इसके बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से सिफारिश की कि मैतेई को अनुसूचित जनजाति (ST) में शामिल किया जाए।

मैतेई का तर्क क्या है: मैतेई जनजाति वाले मानते हैं कि सालों पहले उनके राजाओं ने म्यांमार से कुकी काे युद्ध लड़ने के लिए बुलाया था। उसके बाद ये स्थायी निवासी हो गए। इन लोगों ने रोजगार के लिए जंगल काटे और अफीम की खेती करने लगे। इससे मणिपुर ड्रग तस्करी का ट्राएंगल बन गया है। यह सब खुलेआम हो रहा है। इन्होंने नागा लोगों से लड़ने के लिए आर्म्स ग्रुप बनाया।

नगा-कुकी विरोध में क्यों हैं: बाकी दोनों जनजाति मैतेई समुदाय को आरक्षण देने के विरोध में हैं। इनका कहना है कि राज्य की 60 में से 40 विधानसभा सीट पहले से मैतेई बहुल इंफाल घाटी में हैं। ऐसे में ST वर्ग में मैतेई को आरक्षण मिलने से उनके अधिकारों का बंटवारा होगा।

सियासी समीकरण क्या हैं: मणिपुर के 60 विधायकों में से 40 विधायक मैतेई और 20 विधायक नगा-कुकी जनजाति से हैं। अब तक 12 CM में से दो ही जनजाति से रहे हैं।